जिस आवाज से गांव जागता था, वह अब हमेशा के लिए खामोश है
बागीचों और खेतों में दौड़ती लोमडिय़ां अब सिर्फ यादों में बदलती खेती, रसायनों और सोलर बाड़ ने छीनी वन्यजीवों की जगह विजयनगर। सुबह के चार बजे का वक्त था। गांव…
बागीचों और खेतों में दौड़ती लोमडिय़ां अब सिर्फ यादों में बदलती खेती, रसायनों और सोलर बाड़ ने छीनी वन्यजीवों की जगह विजयनगर। सुबह के चार बजे का वक्त था। गांव…