शरावती परियोजना रोकने की मांग
केंद्र-राज्य से समग्र योजना लाने की अपील
वैज्ञानिकों की सिफारिश लागू करने पर जोर
हुब्बल्ली. पश्चिमी घाट की नदियों और पारिस्थितिकी संरक्षण को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। बेडती-अघनाशिनी घाटी संरक्षण समिति के अध्यक्ष अनंत हेगड़े आशीसर ने केंद्र और राज्य सरकार से इस क्षेत्र के संरक्षण एवं सतत विकास के लिए विशेष समग्र योजना घोषित करने की मांग की है।
शहर में पत्रकारों से बातचीत में आशीसर ने कहा कि शरावती घाटी पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां प्रस्तावित शरावती पम्प्ड स्टोरेज परियोजना को अनुमति नहीं देनी चाहिए। केंद्रीय वन्यजीव बोर्ड के विशेषज्ञों ने भी अपनी रिपोर्ट में इस परियोजना के प्रतिकूल प्रभावों को रेखांकित करते हुए सावधानी बरतने की सिफारिश की है।
आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद राज्य सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने पर अड़ी हुई है, जो पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकती है।
आशीसर ने बेडती और अघनाशिनी नदियों को मोडऩे की प्रस्तावित योजनाओं का भी कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि ऐसी परियोजनाएं लागू होने पर बड़े पैमाने पर वनों की कटाई, भूस्खलन की घटनाएं और किसानों व मछुआरों का विस्थापन होगा।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाट के महत्व और नदियों के योगदान के बारे में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। जल्द ही हुब्बल्ली में स्वर्णवल्ली स्वामी के नेतृत्व में एक विशाल सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जबकि 20 अप्रेल को सिरसी में बैठक कर वैज्ञानिकों की राय ली जाएगी।
स्वाभिमान आंदोलन समिति के अध्यक्ष बसवराज पाटील ने चेतावनी दी कि यदि सरकार विशेषज्ञ समितियों की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर परियोजना को लागू करने का प्रयास करती है, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।
उन्होंने कहा कि उत्तर कन्नड़ जिला पहले ही पर्यावरणीय दबाव झेल रहा है और अब नई परियोजनाओं को अनुमति देना क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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