15 गांवों की नहीं बुझी प्यास: करोड़ों रुपए खर्च के बाद भी पेयजल योजना विफल
पुनरुद्धार के लिए 32 करोड़ रुपए का प्रस्ताव
तेक्कलकोटे (बल्लारी). जिले में नडवी सहित 15 गांवों के लिए शुरू की गई बहुग्राम पेयजल योजना करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद धरातल पर विफल साबित हो रही है। तुंगभद्रा नदी के समीप बसे इन गांवों में आज भी स्वच्छ पेयजल लोगों के लिए मृगतृष्णा बना हुआ है।
खाली पड़ी जल टंकियां, हकीकत बयां करती तस्वीर
योजना के तहत बनाए गए नौ जल भंडारण टैंक आज सूखे पड़े हैं और आधे से अधिक में गाद भर चुकी है। जलाशय में पानी होने के बावजूद टंकियों को नहीं भरा गया, जिससे वे बेकार हो गई हैं।
नडवी समेत 14 अन्य गांवों के लोग अब मजबूरी में बोरवेल के पानी पर निर्भर हैं।
2001 में शुरू, अब तक अधूरी उम्मीदें
यह योजना वर्ष 2001 में लगभग 15 करोड़ रुपए की लागत से शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य नडवी, मुद्दटनूर, निट्टूर, रुद्रपाद, हेरकल, उडेगोल, केंचनगुड्डा, देवलापुर और अन्य गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था।
लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना वर्षों तक अधूरी रही। बाद में शुरू हुई जल आपूर्ति भी पाइपलाइन की खराबियों के कारण बाधित हो गई।
पाइपलाइन फटने से आपूर्ति ठप
पाइपलाइन की मरम्मत के बाद भी जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यों के दौरान कई जगह पाइप फिर से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे नियमित जल आपूर्ति असंभव हो गई। आज तक 14 गांवों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो सका है।
गर्मियों में और गहराता संकट
तुंगभद्रा नदी गर्मियों में 3-4 महीने तक सूख जाती है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। बोरवेल के पानी के उपयोग से ग्रामीणों में जोड़ों के दर्द और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों की मांग—जल्द हो समाधान
नडवी के निवासी मंजुनाथ ने कहा कि यह योजना 15 गांवों के लिए जीवनरेखा बन सकती थी, लेकिन अब तक केवल बोरवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सरकार को जल्द स्थायी समाधान करना चाहिए।
पुनरुद्धार की तैयारी
पेयजल और स्वच्छता विभाग के एईई राहुल के अनुसार, योजना के पुनरुद्धार के लिए 32 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।
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