14 बांधों में 76 प्रतिशत पानी, फिर भी गर्मी की चिंता14 बांधों में 76 प्रतिशत पानी, फिर भी गर्मी की चिंता

कर्नाटक में 25 प्रतिशत बारिश की कमी

677.45 टीएमसी जल भंडारण, कावेरी व जलविद्युत क्षेत्रों में स्थिति सामान्य

बेंगलूरु। कर्नाटक में बारिश की कमी के बीच 14 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। 23 अगस्त तक इन जलाशयों में कुल 76 प्रतिशत पानी जमा है। फिलहाल पेयजल और अन्य जरूरतों को लेकर राहत जरूर है, लेकिन अगले गर्मी के मौसम में कृषि गतिविधियों के लिए पानी की कमी की आशंका बनी हुई है।

895.65 टीएमसी क्षमता, 677.45 टीएमसी पानी

राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों की कुल क्षमता 895.65 टीएमसी है, जबकि वर्तमान में 677.45 टीएमसी पानी जमा है। जलाशयों में कुल 1,06,668 क्यूसेक पानी की आवक और 1,06,028 क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है।

कृष्णा नदी बेसिन के जलाशय भरने की स्थिति में हैं। घटप्रभा जलाशय में 100 प्रतिशत पानी है। आलमट्टी में 99 प्रतिशत, नारायणपुर में 97 प्रतिशत और तुंगभद्रा में 90 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है।

गर्मी में कृषि को झटका संभव

हालांकि अगस्त में 76 प्रतिशत जल भंडारण राहत देने वाला है, लेकिन जलाशयों से अभी बड़े पैमाने पर कृषि के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि अक्टूबर-नवंबर के अंत तक जलाशयों में 90 से 100 प्रतिशत भंडारण नहीं हुआ तो अगले गर्मी के मौसम में कृषि क्षेत्र को पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पश्चिमी घाट की बारिश पर निर्भर लिंगनमक्की, सुपा और वाराही जलाशयों में औसतन करीब 58 प्रतिशत पानी ही है। अगस्त के बाद मलनाड क्षेत्र में बारिश कम होने की संभावना को देखते हुए इन जलाशयों में भी जल स्तर घट सकता है।

जलवायु विशेषज्ञ डॉ. जी.एस. श्रीनिवास रेड्डी के अनुसार इससे गर्मी में बिजली उत्पादन और कृषि दोनों पर दबाव पड़ सकता है।

तमिलनाडु को पानी छोडऩे पर बढ़ेगी चिंता

कावेरी बेसिन के जलाशयों में करीब 75 प्रतिशत पानी है, लेकिन अब तक अपेक्षित प्रवाह का लगभग आधा ही पानी आया है। विशेषज्ञों के अनुसार तमिलनाडु को करीब 20 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका है। आने वाले महीनों में फिर पानी छोड़ा गया तो कावेरी क्षेत्र में जल संकट बढ़ सकता है।

राज्य में 25 प्रतिशत बारिश कम

1 जून से 23 अगस्त तक कर्नाटक में 25 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में 465.3 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 624.5 मिमी होनी चाहिए थी। तटीय कर्नाटक में 24 प्रतिशत, उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 16 प्रतिशत और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 32 प्रतिशत कमी रही।

डॉ. श्रीनिवास रेड्डी के मुताबिक, मानसून का करीब 70 प्रतिशत समय बीत चुका है और अब लगभग एक माह ही शेष है। ऐसे में मौजूदा जल भंडारण अगले गर्मी के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

 

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By Bharat Ki Awaz

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