तीन साल में 582 फर्जी डॉक्टर पकड़े, क्लीनिक सीलफर्जी डॉक्टर।

कल्याण कर्नाटक में सबसे अधिक मामले

बिना पंजीकरण चिकित्सा करने वालों पर तीन साल तक जेल

हुब्बल्ली। कर्नाटक में घटिया दवाओं के मामले के बीच अब फर्जी डॉक्टरों का नेटवर्क भी चिंता का विषय बन गया है। स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई में पिछले तीन वर्षों के दौरान 582 फर्जी डॉक्टरों के मामले दर्ज किए गए हैं। इनके क्लीनिक बंद कराए गए हैं। इनमें से 87 पर जुर्माना लगाया गया, जबकि 128 ने अब तक जुर्माना नहीं भरा है। 29 मामले अदालतों में विचाराधीन हैं।

दावणगेरे के कोनसागर में एक फर्जी महिला चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के बाद किसान की मौत की घटना ने इस नेटवर्क की गंभीरता उजागर की है। जांच में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां आरोपी बिना अनुमति अस्पताल या घर में क्लीनिक चलाने के साथ प्रयोगशाला तक संचालित कर रहे हैं। कुछ मामलों में जमानत पर बाहर आने के बाद दूसरे नाम से फिर क्लीनिक शुरू करने की जानकारी मिली है।

जिलों में विशेष दल सक्रिय

फर्जी डॉक्टरों की पहचान के लिए राज्य सरकार ने 2017 में जिलाधिकारियों के नेतृत्व में जिला स्तरीय विशेष दल गठित किया था। इसमें पुलिस अधीक्षक, आयुष अधिकारी सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। लगातार कार्रवाई के बावजूद कई क्षेत्रों में यह नेटवर्क सक्रिय है।

इन जिलों में सबसे अधिक मामले

2024-26 के आंकड़ों के अनुसार कलबुर्गी में 127, रायचूर में 124, धारवाड़ में 75, कोलार में 31, विजयपुर में 24, बल्लारी में 23, दक्षिण कन्नड़ में 20 और बेंगलूरु शहर में 16 मामले सामने आए हैं।

तत्काल कार्रवाई की जाएगी

स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर ने कहा कि फर्जी डॉक्टरों पर भी कड़ाई से अंकुश लगाया जाएगा। सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी प्रावधान

केपीएमइ संशोधन अधिनियम-2017 के तहत बिना अनुमति चिकित्सा करने पर तीन वर्ष तक कारावास और एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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