किसानों का तीव्र विरोध, घर-खेत खोने का भय
हुब्बल्ली। धारवाड़-बेलगावी के बीच प्रस्तावित महत्वाकांक्षी औद्योगिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 6,000 एकड़ भूमि अधिग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया है। योजना के तहत अब तक 3,500 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है, परन्तु शेष बची जमीन को लेकर स्थानीय किसानों ने अपनी भूमि देने से साफ इंकार करते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
अस्तित्व और आजीविका का संकट
अधिग्रहण की इस प्रक्रिया से प्रभावित कई परिवार पीढिय़ों से अपने खेतों में ही घर बनाकर निवास कर रहे हैं। वे कृषि के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन, बकरी एवं मुर्गी पालन जैसे सहायक व्यवसायों से अपनी आजीविका चला रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस अधिग्रहण से वे न केवल अपनी उपजाऊ भूमि बल्कि अपने आशियाने भी खो देंगे। व्यथित किसान मंजुनाथ ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज वर्षों से इसी मिट्टी में रचे-बसे थे, लेकिन अब हमें यहां से बेदखल होना पड़ेगा। जमीन छीन जाने के बाद हमारा और हमारे बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा?
पर्यावरण और प्रदूषण की चिंता
भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण औद्योगिक प्रदूषण को लेकर भी बेहद चिंतित हैं। किसानों का प्रश्न है कि यदि आवासीय क्षेत्रों के पास भारी कारखाने स्थापित कर दिए गए, तो दूषित वातावरण में उनका जीना दूभर हो जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार, अब तक वे जिस स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहे थे, वह समाप्त हो जाएगा और उन्हें मजबूरी में मजदूरी करने पर विवश होना पड़ेगा।
सरकार और प्रशासन से गुहार
प्रभावित किसानों ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपने हितों की रक्षा करने की गुहार लगाई है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि औद्योगिक प्रगति और विकास की प्रक्रिया में किसानों की आजीविका एवं उनके अस्तित्व को सुरक्षित रखना भी उतना ही अनिवार्य है, जितना कि उद्योगों की स्थापना।
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