ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारीलक्ष्मेश्वर में सोमेश्वर मंदिर के उत्तर महाद्वार के संरक्षण कार्य के लिए भूमि पूजन कर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यटन मंत्री डॉ. एच.के. पाटिल।

पर्यटन मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा

लक्ष्मेश्वर के ऐतिहासिक सोमेश्वर मंदिर के विकास को 2.40 करोड़ रुपए

लक्ष्मेश्वर (गदग). पर्यटन मंत्री डॉ. एच.के. पाटिल ने कहा कि गदग जिले के लक्ष्मेश्वर स्थित प्राचीन सोमेश्वर मंदिर के विकास और संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने 2.40 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।

वे सोमेश्वर मंदिर के उत्तर महाद्वार के संरक्षण कार्य के लिए भूमि पूजन कर बोल रहे थे।

मंत्री पाटिल ने कहा कि गदग जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां की प्रत्येक शिला इतिहास और परंपरा की कहानी कहती है। ऐसी अमूल्य विरासत का संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है। इस क्षेत्र को अनेक महान साहित्यकारों और संतों ने समृद्ध बनाया है।

उन्होंने उल्लेख किया कि इस भूमि ने नयसेन, दुर्गसिंह, चामरस, अत्तिमब्बे, कुमारव्यास और आदिकवि पंप जैसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है। साहित्य क्षेत्र में भी एम.एस. सुंकापुर, कीर्तिनाथ कुर्तकोटी, सोमशेखर इमरापुर और हुयिलगोल नारायणराव जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने इस क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

मंत्री पाटिल ने कहा कि लक्ष्मेश्वर और आसपास के क्षेत्रों का इतिहास अत्यंत समृद्ध रहा है। रंभापुरी गंगाधर स्वामी ने यहां धार्मिक जागृति फैलाने का कार्य किया था, जबकि पुलिगेरे क्षेत्र आदिकवि पंप की कर्मभूमि रहा है। मंदिर के आसपास रहने वाले लोग यदि विकास कार्यों के लिए सहयोग दें, तो इस क्षेत्र को और अधिक सुंदर और पर्यटन के अनुकूल बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मंदिर के उत्तर महाद्वार की मरम्मत, जलरोधक परत, छत की मरम्मत सहित कुल 12 विकास कार्य किए जाएंगे। अधिकारियों को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि सभी कार्य उच्च गुणवत्ता और ऐतिहासिक स्वरूप को सुरक्षित रखते हुए करने चाहिए।

कार्यक्रम में मुक्तिमंदिर धर्मक्षेत्र के मठ प्रमुख विमलरेणुक वीरमुक्तिमुनि शिवाचार्य महास्वामी ने कहा कि मंत्री पाटिल के नेतृत्व में प्रदेश के धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास तेजी से हो रहा है।

इस अवसर पर जिलाधिकारी सी.एन. श्रीधर, उपविभागीय अधिकारी एम. गंगप्पा, पूर्व विधायक जी.एस. गड्डदेवरमठ, रामन्ना लमाणी, रामकृष्ण दोड्डमनी सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम की प्रस्तावना चन्नप्पा जगली ने रखी, जबकि संचालन गंगाधर गुडगेरी और सोमन्ना केरिमनी ने किया।

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By Bharat Ki Awaz

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