कई बंद होने की कगार पर
पश्चिम एशिया युद्ध का असर
लकड़ी के चूल्हे और पुराने स्टोव का सहारा ले रहे होटल संचालक
सागर (शिवमोग्गा). पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण उत्पन्न आपूर्ति संकट का असर अब कर्नाटक के सागर शहर में साफ दिखाई दे रहा है। वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की कमी से होटल उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई होटल अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ बंद होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।
स्थिति इतनी गंभीर है कि कई होटल संचालक अब पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय “मैसूर कैफे” के मालिक भास्कर शेट्टी ने बताया कि पिछले सप्ताह तीन दिन गैस नहीं मिलने से होटल बंद रखना पड़ा। अब हम घर पर लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाकर होटल में लाकर ग्राहकों को परोस रहे हैं।
इसी तरह “पवित्र होटल” के मालिक एम. नागराज ने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका कोई संकेत नहीं है। इसलिए हमने वैकल्पिक उपाय अपनाए हैं। लकड़ी के चूल्हे पर खाना बन रहा है और रोटी बनाने के लिए इंडक्शन स्टोव का उपयोग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 1980 के दशक में प्रचलित केरोसिन पंप स्टोव भी अब फिर से उपयोग में आने लगे हैं। केरोसिन की कमी के चलते कुछ होटल संचालक इन स्टोव में डीजल का इस्तेमाल कर चाय-कॉफी तैयार कर रहे हैं।
इस बीच गैस एजेंसियों पर भी दबाव बढ़ गया है। “इंधन गैस एजेंसी” के मालिक बी.आर. जयंत ने बताया कि पहले प्रतिदिन 500 घरेलू सिलेंडर मिलते थे, अब केवल 360 ही आ रहे हैं। हालांकि घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लोग समय से पहले बुकिंग कर रहे हैं, जिससे दिक्कत बढ़ रही है।
“सागर गैस एजेंसी” के संचालक के.एस. सुब्बाराव ने बताया कि हमारी आपूर्ति में 20-30 प्रतिशत की कमी आई है। घरेलू गैस तो मिल रही है, लेकिन वाणिज्यिक सिलेंडरों की भारी कमी है।
होटल मालिक संघ के अध्यक्ष प्रसाद ने कहा कि सरकार ने वाणिज्यिक सिलेंडरों पर कुछ प्रतिबंध हटाए हैं, जिससे थोड़ी राहत मिली है। लेकिन रोज कम से कम एक सिलेंडर नहीं मिला तो होटल चलाना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि होटल संचालकों ने सरकार से मांग की है कि वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। यह उद्योग सरकार को नियमित कर देता है, इसलिए इसे बचाना सरकार की जिम्मेदारी है।
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