ग्रामीणों में आक्रोश
रोण (गदग). तालुक के यरेकुरुबनाल गांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इटगी और हिरेहाल ग्राम पंचायतों के बीच प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बना यह गांव आज भी स्वच्छता, सडक़ और पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित है।
करीब 500 से 600 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब है। टूटी हुई नालियां और जगह-जगह भरा गंदा पानी गांव को बीमारी का अड्डा बना रहा है। सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण खुले में शौच जाना मजबूरी बन गई है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था और भी बदहाल हो गई है।
गांव में पक्की सडक़ों का अभाव है और अधिकांश रास्ते कच्चे तथा जर्जर हैं। बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए नालों को पार करना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित रहते हैं।
सबसे बड़ी समस्या परिवहन की है। गांव में आज तक उचित बस सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई है। ग्रामीणों को दूसरे गांव या शहर जाने के लिए करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर मुशिगेरी-इटगी मार्ग तक पहुंचना पड़ता है, जहां से बस मिलती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत प्रशासन केवल कुछ चुनिंदा गांवों तक ही सीमित रह गया है और यरे कुरुबनाल की लगातार अनदेखी की जा रही है। वहीं, गांव के पास बहने वाले नाले से रेत खनन होने के बावजूद विकास कार्यों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय युवक शिवकुमार ने बताया कि खराब सडक़ों के कारण बारिश के दिनों में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को एंबुलेंस सुविधा तक नहीं मिल पाती, जिससे जान का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द सडक़, नाली, पेयजल और परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, अन्यथा वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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