भगवान महावीर के आदर्शों को आत्मसात करेंविजयपुर में सोमवार को भगवान महावीर जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन करते अपर जिलाधिकारी डॉ. औद्राम।

अपर जिलाधिकारी डॉ. औद्राम ने किया आह्वान

भगवान महावीर जयंती पर जिला प्रशासन का भव्य आयोजन

विजयपुर. जिला प्रशासन, जिला पंचायत तथा कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शहर के कंदगल हनुमंतराय रंगमंदिर में भगवान महावीर जयंती का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन अपर जिलाधिकारी डॉ. औद्राम ने किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान महावीर के जीवन, त्याग और उनके द्वारा दिए गए महान संदेशों पर प्रकाश डाला।

त्याग और अहिंसा के प्रतीक हैं महावीर

डॉ. औद्राम ने कहा कि भगवान महावीर त्याग, अहिंसा और वैराग्य के साकार रूप थे। उन्होंने समाज को समानता का संदेश देते हुए जाति-पांति के भेदभाव को नकारा और सभी को समान बताया। उनके द्वारा प्रतिपादित सत्य और अहिंसा जैसे मूलभूत सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महावीर के आदर्शों को अपनाकर जीवन को सार्थक बनाएं।

युवाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

उन्होंने कहा कि “जीओ और जीने दो”, “सत्य बोलो”, “चोरी मत करो” और “अहिंसा ही परम धर्म है” जैसे संदेश मानवता के लिए अमूल्य धरोहर हैं। महावीर ने अपने विचारों के माध्यम से पूरी दुनिया को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाया। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण के माध्यम से व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है।

विशेष व्याख्यान और विचार गोष्ठी

कार्यक्रम में हीराचंद गांधी ने विशेष व्याख्यान देते हुए महावीर के सिद्धांतों—सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य—का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि इन पांच व्रतों का पालन करने से व्यक्ति आत्मिक शांति और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।

महानगर निगम के उप आयुक्त महावीर बोरन्नवर ने कहा कि महावीर के विचार कालातीत हैं और आज भी समाज के मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

धार्मिक व ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख

कार्यक्रम में भरत और बाहुबली के बीच हुए युद्ध तथा बाहुबली की कठोर तपस्या का भी उल्लेख किया गया, जिसने अंतत: उन्हें ज्ञान की प्राप्ति कराई। वक्ताओं ने कहा कि इन प्रसंगों से हमें संयम, धैर्य और आत्मविकास की प्रेरणा मिलती है।

भव्य शोभायात्रा से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम से पूर्व सुबह सिद्धेश्वर मंदिर परिसर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसे डॉ. औद्राम ने भगवान महावीर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर रवाना किया। शोभायात्रा में विभिन्न वाद्य दलों और सांस्कृतिक समूहों ने भाग लिया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

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