सीवेज, कचरा और लापरवाही से बिगड़ रही ‘जीवजल’ की स्थिति, लोगों में चिंता
उडुपी. जिले में बढ़ती गर्मी के साथ नदियों का जलस्तर घट रहा है और इसी के साथ जल प्रदूषण का खतरा भी गहराता जा रहा है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सीवेज, प्लास्टिक कचरा और अन्य अपशिष्ट नदियों में डाले जाने से ‘जीवजल’ गंभीर रूप से दूषित हो रहा है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर संकट मंडरा रहा है।
सीवेज और कचरे से बिगड़ती हालत
उडुपी शहर से निकलने वाला गंदा पानी नदियों के जरिए समुद्र में मिल रहा है। खासकर इंद्राणी नदी पूरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। कई अपार्टमेंट्स में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न होने के कारण गंदा पानी सीधे वर्षा जल नालों के माध्यम से नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे आसपास दुर्गंध फैल रही है और जलचर जीवों पर भी खतरा बढ़ गया है।
रात के अंधेरे में कचरा फेंकने की प्रवृत्ति
स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय वाहन चालकों द्वारा पुलों से प्लास्टिक में भरा कचरा, विशेषकर पोल्ट्री वेस्ट, नदियों में फेंका जा रहा है। इससे न केवल नदी का पानी दूषित हो रहा है, बल्कि पूरे क्षेत्र में बदबू फैल रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
अन्य नदियां भी संकट में
पडुबिद्री क्षेत्र की कामिनी नदी में भी बड़े पैमाने पर कचरा और सीवेज डाला जा रहा है, जिससे पानी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। वहीं कार्कला और शिरवा क्षेत्रों में छोटे नालों और जलधाराओं में प्लास्टिक, घरेलू कचरा और पशु अवशेष डाले जा रहे हैं, जो आगे जाकर बड़ी नदियों में मिलते हैं।
सीसीटीवी और कार्रवाई के प्रयास
बयंदूर में स्थानीय प्रशासन ने ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ चिन्हित कर वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है, जिससे कुछ हद तक सुधार देखने को मिला है।
एसटीपी अपग्रेड से उम्मीद
निट्टूर स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को 30 करोड़ रुपए की लागत से अपग्रेड किया जा रहा है। वर्तमान में 12 एमएलडी क्षमता वाले इस प्लांट में अतिरिक्त 8 एमएलडी क्षमता जोड़ी जाएगी। इससे कुल 20 एमएलडी पानी का शोधन संभव होगा और नदी प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जल स्रोत पूरी तरह प्रदूषित हो सकते हैं। औद्योगिक अपशिष्ट और कृषि में अत्यधिक रसायनों का उपयोग भी प्रदूषण बढ़ा रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त निगरानी, अपार्टमेंट्स में अनिवार्य एसटीपी व्यवस्था और कचरा फेंकने वालों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। साफ जल स्रोतों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास अब बेहद जरूरी हो गया है, वरना आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।
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