श्रद्धा, भक्ति और उल्लास से गूंजा शहर
आचार्य ने दिया धर्म प्रसार का संदेश
गदग. भगवान महावीर स्वामी के 2625वें जन्मकल्याणक के अवसर पर गदग शहर में वरघोड़े का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। पूरे शहर में जयकारों, भक्ति गीतों और धार्मिक उल्लास का वातावरण छाया रहा।
महावीर सर्किल से हुआ शुभारंभ
मंगलवार प्रात: मुलगूंद नाका स्थित महावीर सर्किल पर भगवान महावीर की प्रतिमा का विधिवत माल्यार्पण कर वरघोड़े का शुभारंभ किया गया। यह शोभायात्रा आचार्य विजयचंद्रभूषण सुरिश्वर एवं साध्वी आदि ठाणा की निश्रा में सम्पन्न हुई।
धार्मिक स्थलों पर दर्शन-वंदन
वरघोड़ा कुशलधाम दादावाड़ी, गुजराती मंदिर, स्टेशन रोड स्थित पाश्र्वनाथ मंदिर, मुनिसुव्रत मंदिर एवं वासुपूज्य जैन मंदिर होते हुए आगे बढ़ता गया। मार्ग में श्रद्धालुओं ने रंगोली सजाकर, पुष्प वर्षा कर तथा आरती उतारकर भव्य स्वागत किया।
युवा वर्ग बना आकर्षण का केंद्र
इस शोभायात्रा में युवा वर्ग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक पूजा वेशभूषा में सजे युवा भगवान की पालकी को अपने कंधों पर उठाए चल रहे थे। साथ ही जिनशासन की ध्वजाएं लहराते हुए धर्म जागरण का संदेश दे रहे थे। बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर बच्चे और युवा उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए।
धार्मिक उत्सव में बदला शहर
पुरुष, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक परिधानों में बड़ी संख्या में शामिल हुए, जिससे पूरा गदग शहर धार्मिक उत्सव में परिवर्तित हो गया।
धर्मसभा में हुआ समापन
वरघोड़ा अंतत: महावीर गौशाला पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुआ। यहां आयोजित सभा में आचार्य विजयचंद्रभूषण सुरिश्वर ने प्रवचन देते हुए जैन धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जैन धर्म को विश्व वंदनीय बनाने के लिए प्रत्येक श्रावक-श्राविका को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने गौशाला के लिए सहयोग राशि अर्पित कर सेवा भाव का परिचय दिया।
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