तटीय सुरक्षा को मिली स्वदेशी ताकत
गोवा शिपयार्ड की बड़ी उपलब्धि
भारतीय नौसेना के लिए अत्याधुनिक ऑफशोर पेट्रोल पोत तैयार
गोवा (वास्को-ड-गामा). भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) ने भारतीय नौसेना के लिए निर्मित अत्याधुनिक ‘यार्ड-1280’ ऑफशोर पेट्रोल पोत का सफलतापूर्वक जलावतरण किया। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।
स्वदेशी तकनीक की मिसाल
‘यार्ड-1280’ पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित किया गया है। करीब 110 मीटर लंबा यह पोत 25 नॉट्स की अधिकतम गति से संचालित हो सकता है और बिना ईंधन भरे लगभग 8,500 नॉटिकल मील तक समुद्र में कार्य करने की क्षमता रखता है। यह लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और गश्त के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
आधुनिक हथियार और सुविधाएं
इस युद्धपोत में 76 मिमी सुपर रैपिड गन, 30 मिमी एके-630 गन और दुश्मन की मिसाइलों से बचाव के लिए उन्नत चाफ प्रणाली लगाई गई है। इसके अलावा, पोत के पिछले हिस्से में हेलिकॉप्टर डेक की सुविधा है, जहां मध्यम श्रेणी के हेलिकॉप्टर आसानी से संचालन कर सकते हैं।
बहुउद्देश्यीय भूमिका
यह पोत तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती रोधी अभियानों, खोज एवं बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाएगा। भारत के विस्तृत तटीय क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे पोतों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
रोजगार और औद्योगिक बढ़ावा
भारतीय नौसेना ने कुल 11 ऐसे पोतों का आदेश दिया है, जिनमें से 7 का निर्माण जीएसएल और 4 का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा किया जा रहा है। इस परियोजना से गोवा में लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन मिला है और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।
अगले चरण की तैयारी
फिलहाल यह पोत ‘लॉन्च’ चरण में है। आगे इंजन परीक्षण, हथियार प्रणाली एकीकरण और समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल्स) किए जाएंगे। सभी परीक्षण सफल होने के बाद इसे भारतीय नौसेना को औपचारिक रूप से सौंपा जाएगा।
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