उपचुनाव को बताया सत्ता परिवर्तन का संकेत, सीएम को काम दिखाने की खुली चुनौती
दावणगेरे: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने दावा किया है कि आगामी उपचुनाव के बाद मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या को ‘गेटपास’ मिल जाएगा और राज्य में राजनीतिक परिवर्तन का दौर शुरू होगा।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए सोमन्ना ने कहा कि दावणगेरे दक्षिण और बागलकोट के मतदाता कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2028 से पहले ही राज्य में चुनाव हो सकते हैं और एक नए युग की शुरुआत होगी।
सोमन्ना ने कहा कि उपचुनाव को जनता ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की है और यह चुनाव उनके स्वाभिमान और राजनीतिक भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा उम्मीदवार श्रीनिवास दास करीयप्पा निश्चित रूप से जीत हासिल करेंगे।
उन्होंने मनरेगा में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 41 लाख फर्जी कार्ड होने की बात नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सामने आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासित राज्यों में इस तरह की गड़बड़ियां हुई हैं, जिसके बाद केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सोमन्ना ने कहा कि भाजपा तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करती और सभी के सम्मान में विश्वास रखती है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या को सलाह दी कि वे अन्य नेताओं और केंद्रीय नेतृत्व के प्रति सम्मानजनक व्यवहार अपनाएं।
सीएम द्वारा “सोमन्ना के पास काम नहीं है” टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्होंने खुली चुनौती दी कि “आप मेरे कार्यालय में आकर दो-तीन घंटे बैठें, आपको मेरे काम का पूरा अंदाजा हो जाएगा।”
उन्होंने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि दक्षिण भारत में 18 नई रेल परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जबकि कोविड के बाद रुकी 62 परियोजनाओं को फिर से चालू किया गया है। कई रेल मार्गों का विस्तार किया गया है और नए मार्गों पर तेजी से काम चल रहा है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न रेल परियोजनाओं के लिए हजारों करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही 61 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण और 1657 किलोमीटर नए रेल मार्ग का निर्माण किया गया है।
सोमन्ना ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में 25 जिलों में जन-सुनवाई बैठकें आयोजित की गईं और केंद्र व राज्य की 11 योजनाओं के लिए 52 हजार करोड़ रुपए की राशि जारी कराई गई। पहले जहां सालाना 400 करोड़ रुपए का अनुदान मिलता था, अब वह बढ़कर 7500 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
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