कोप्पल में प्रदूषण से कराहते गांवकोप्पल में फैक्ट्रियों के प्रदूषण और विस्तार के विरोध में धरना प्रदर्शन करते नागरिक।

दया मृत्यु’ की गुहार तक पहुंची बेबसी

लौह व स्पंज आयरन कारखानों के धुएं से बिगड़ी सेहत

150 दिन से जारी आंदोलन; विस्तार योजना पर भी घमासान

कोप्पल. जिले में औद्योगिक प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। हिरेबगनाल सहित आसपास के 20 से अधिक गांवों में लोगों का जीवन संकट में है। काले धूलकणों से फैल रहे प्रदूषण के कारण ग्रामीणों में श्वसन रोग, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि प्रभावित परिवार अब जीवन से अधिक राहत की मांग कर रहे हैं।

जिले के हिरेबगनाल गांव से उभरती तस्वीरें भयावह हैं। यहां प्रदूषण के कारण लोगों का जीवन इतना दयनीय हो गया है कि एक मां ने अपने गंभीर रूप से बीमार बेटे को गोद में लिए ‘दया मृत्यु’ की मांग तक कर डाली। 18 वर्षीय संतोष, जो शारीरिक रूप से असहाय है, पिछले कुछ वर्षों से असहनीय पीड़ा झेल रहा है, जिससे उसके माता-पिता सिद्धम्मा और देवप्पा टूट चुके हैं।

हर घर में बीमारी की कहानी

गांव के अधिकांश परिवार प्रदूषण जनित बीमारियों से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की हालिया जांच में 2,300 की आबादी वाले गांव में 124 लोग श्वास रोग, 49 त्वचा रोग, 25 टीबी, जबकि कैंसर के भी मामले सामने आए हैं। बच्चों और बुजुर्गों की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।

कारखानों का ‘काला जहर’

गांव के आसपास संचालित स्पंज आयरन और लौह कारखानों से निकलने वाला काला धूलकण (पार्टिकुलेट मैटर) वातावरण को विषाक्त बना रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कारखाने दिन में कम और रात में अधिक प्रदूषण फैलाते हैं, ताकि विरोध से बचा जा सके। प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरणों का उपयोग भी नियमित रूप से नहीं किया जाता।

जल, जमीन और रिश्तों पर असर

प्रदूषण का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। खेती प्रभावित हो रही है, फसलों की गुणवत्ता घट रही है और बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहा। वहीं, युवाओं के विवाह संबंध भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि बाहरी लोग इस गांव में रिश्ते करने से कतराते हैं।

विस्तार योजना से बढ़ी चिंता

इसी बीच, क्षेत्र की बड़ी कंपनी बल्डोट समूह द्वारा 1034 एकड़ में कारखाने के विस्तार की योजना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। इसके विरोध में ‘कोप्पल जिला बचाओ आंदोलन’ और अन्य संगठनों द्वारा पिछले 150 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना जारी है।

प्रशासन और आंदोलन आमने-सामने

जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कुछ कारखानों को नोटिस जारी करने की बात कही है, वहीं आंदोलनकारी किसी भी कीमत पर विस्तार रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे उद्योगों के विरोधी नहीं, बल्कि प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ हैं।

जीवन बनाम विकास का सवाल

तीन दशकों पहले रोजगार की उम्मीद में जिन उद्योगों का स्वागत किया गया था, वही आज लोगों के जीवन पर भारी पड़ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या विकास की कीमत लोगों की सेहत और जीवन से चुकाई जाएगी, या सरकार समय रहते ठोस कदम उठाएगी।

उद्योग विस्तार के खिलाफ आंदोलन तेज

बल्डोट समूह द्वारा 1034 एकड़ में स्टील प्लांट विस्तार की योजना के विरोध में ‘कोप्पल जिला बचाओ आंदोलन समिति’ और अन्य संगठनों द्वारा पिछले 150 दिनों से धरना जारी है।

आंदोलन के संयोजक अल्लमप्रभु बेट्टदूर ने कहा कि यदि कारखाने बढ़े तो गांवों को खाली करना पड़ेगा। वर्तमान हालात में यहां रहना मुश्किल हो गया है।

किसानों की पीड़ा और मांगें

स्थानीय किसान महेश ने कहा कि प्रदूषण के कारण गांव में बीमारियों का कहर है। अगर विस्तार हुआ तो हालात और बिगड़ेंगे।
भूमि गंवाने वाले किसान हनुमंतप्पा कौदि ने मांग की कि उन्हें रोजगार या वैकल्पिक व्यवस्था दी जाए।

प्रशासन की सख्ती के संकेत

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पीएम. नरेंद्रस्वामी ने कहा कि दोषी कारखानों को नोटिस जारी किया जाएगा और नियमों का पालन न करने पर बंद करने की कार्रवाई होगी।

जिलाधिकारी डॉ. सुरेश इटनाळ ने बताया कि कुछ इकाइयों को नोटिस दिया जा चुका है, आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।

कंपनी का पक्ष

बल्डोट समूह के वरिष्ठ प्रबंधक महेश मानकरे का कहना है कि कंपनी पर्यावरण मानकों का पूरी तरह पालन कर रही है और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रही है।

जीवन बनाम विकास का संघर्ष

कोप्पल में आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास और उद्योगों की कीमत क्या लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से चुकाई जाएगी। ग्रामीणों का संघर्ष अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की लड़ाई बन चुका है।

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *