कांस्टेबलों को 3 घंटे धूप में खड़ा रखा

चिक्कजाजूर थाने में विवाद, जांच के आदेश

3 पुलिसकर्मियों की तबीयत बिगड़ी

चित्रदुर्ग. जिले के होललकेरे तालुक स्थित चिक्कजाजूर पुलिस थाने में कथित अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। यहां की पीएसआई नेत्रावती पर आरोप है कि उन्होंने 12 पुलिस कांस्टेबलों को सजा के तौर पर कड़ी धूप में लगातार तीन घंटे तक बंदूक पकड़ाकर खड़ा रखा।

क्या है पूरा मामला

बताया जा रहा है कि यह घटना तीन दिन पहले की है, जो अब सामने आई है। आरोप है कि पीएसआई ने किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत यह सजा दी, लेकिन इसे लेकर पुलिस विभाग में ही नाराजगी और चर्चा तेज हो गई है।

धूप में खड़े रहने से बिगड़ी तबीयत

भीषण गर्मी में लंबे समय तक खड़े रहने के कारण 12 में से 3 पुलिसकर्मियों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत होललकेरे अस्पताल में भर्ती कर इलाज कराया गया। घटना के बाद पुलिस महकमे में चिंता और असंतोष का माहौल है।

विवाद के पीछे वजह पर सवाल

युगादि त्योहार के दौरान एक जुए (रेड) मामले में बड़ी रकम मिलने को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच चर्चा चल रही थी। इसी बात को लेकर पीएसआई द्वारा नाराजगी दिखाने और कथित तौर पर बदले की भावना से कार्रवाई करने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

सीसीटीवी में कैद हुई घटना

घटना से जुड़ी पूरी गतिविधि पुलिस थाने के सीसीटीवी कैमरों में कैद होने की बात सामने आई है, जिससे जांच में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।

जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए चित्रदुर्ग के एसपी रंजीत कुमार बंडारु ने डीवाईएसपी अरुण गौड़ा को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *