कांग्रेस से दूरी बना रहे मुस्लिमकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चर्चा करते हुए बीएस येडियूरप्पा और बीवाई विजयेंद्र।

भाजपा को मिला ‘सही समय’ का संकेत!

जेडीएस भी सक्रिय

दावणगेरे उपचुनाव के बाद बदला सियासी समीकरण

कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर नजर

भाजपा-जेडीएस रणनीति में जुटे

हुब्बल्ली. कर्नाटक की राजनीति में दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। उपचुनाव के नतीजों से पहले ही यह संकेत मिलने लगे हैं कि मुस्लिम मतदाता कांग्रेस से कुछ हद तक दूरी बना रहे हैं। इसी स्थिति को भुनाने के लिए भाजपा नेतृत्व ने राज्य इकाई को “सही समय पर प्रहार” करने के संकेत दिए हैं।

कांग्रेस की अंदरूनी कलह बनी चिंता

उपचुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट न देने के फैसले से कांग्रेस के भीतर असंतोष उभरकर सामने आया है। वरिष्ठ नेताओं – जमीर अहमद खान, सलीम अहमद, रिजवान अरशद और एनए. हैरिस के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अंदरूनी खींचतान आने वाले चुनावों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है।

भाजपा की रणनीति तैयार

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष बीवाई. विजयेंद्र को कांग्रेस की गतिविधियों पर नजर रखने और मौके का लाभ उठाने के निर्देश दिए हैं।
पार्टी अब मुस्लिम समुदाय के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने की रणनीति पर विचार कर रही है, ताकि “दूरी कम” करने का प्रयास किया जा सके।

मुस्लिम वोटों में बदलाव की चर्चा

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि दावणगेरे में कुछ मुस्लिम मत भाजपा उम्मीदवार की ओर शिफ्ट हुए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सतीश जारकीहोली के बयान ने भी इस चर्चा को बल दिया है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव सीमित स्तर पर है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बड़ा है।

जेडीएस भी मैदान में

इस बदले समीकरण के बीच जेडीएस भी सक्रिय हो गई है। मुस्लिम वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी नए सिरे से रणनीति बना रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस से नाराज मतदाता जेडीएस या अन्य क्षेत्रीय दलों की ओर रुख कर सकते हैं।

2028 चुनाव पर नजर

भाजपा, जेडीएस और कांग्रेस – तीनों दल अब 2028 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तय कर रहे हैं। जहां भाजपा इस मौके को राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस के सामने अपने परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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