गन्ना अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव
राज्य में नई चीनी मिलों के लिए 42 आवेदन
अकेले बेलगावी से 13 प्रस्ताव
किसान संगठनों ने गन्ने के दाम और बकाया भुगतान को लेकर जताई चिंता
बेलगावी। कर्नाटक में चीनी उद्योग के विस्तार की नई होड़ शुरू हो गई है। राज्य सरकार को नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए 42 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 13 आवेदन अकेले बेलगावी जिले से हैं। पहले से ही राज्य में सर्वाधिक चीनी मिलों वाला यह जिला अब इस क्षेत्र में अपनी बढ़त और मजबूत करने की तैयारी में है। हालांकि, किसान संगठनों ने आशंका जताई है कि मिलों की संख्या बढऩे से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि गन्ना मूल्य और बकाया भुगतान को लेकर संघर्ष और बढ़ सकता है।
वर्तमान में कर्नाटक में 81 चीनी मिलें संचालित हैं, जिनमें 29 मिलें केवल बेलगावी जिले में हैं। यदि सभी 13 प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो जिले में चीनी मिलों की संख्या बढक़र 42 हो जाएगी। प्रस्तावित नई मिलें रामदुर्ग, बैलहोंगल, कित्तूर, सवदत्ती, बेलगावी, गोकाक, अथणी, रायबाग और खानापुर क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी।
सिंचाई और एथेनॉल उद्योग बना आकर्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, कृष्णा, घटप्रभा, दूधगंगा, वेदगंगा, हिरण्यकेशी, मलप्रभा और मार्कंडेय नदियों के साथ व्यापक सिंचाई सुविधाएं, विकसित औद्योगिक ढांचा तथा एथेनॉल और सह-उत्पादन आधारित बिजली परियोजनाओं की संभावनाएं बेलगावी को निवेश के लिए आकर्षक बना रही हैं। महाराष्ट्र से बेहतर संपर्क और आसपास के क्षेत्रों से गन्ने की उपलब्धता भी नए निवेश का प्रमुख कारण मानी जा रही है।
किसानों ने जताई आशंका
कर्नाटक गन्ना उत्पादक संघ के अध्यक्ष कुरुबूर शांतकुमार ने कहा कि नई चीनी मिलों से किसानों को विशेष लाभ नहीं मिलेगा। उनके अनुसार, अधिकांश मिलों का संचालन प्रभावशाली राजनीतिक और औद्योगिक समूहों के हाथ में है, इसलिए गन्ने का उचित मूल्य और बकाया भुगतान जैसी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जब तक किसानों को लाभकारी मूल्य की गारंटी नहीं मिलती, तब तक नई मिलों की स्थापना से केवल उद्योग को फायदा होगा, किसानों को नहीं।
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