कृष्णा बेसिन में भारी वर्षा से जलाशयों में बढ़ी आवक
आलमट्टी 83 प्रतिशत भरा, किसानों में सिंचाई को लेकर बढ़ी उम्मीद
विजयपुर/यादगीर। महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट और कृष्णा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा का असर उत्तर कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों पर साफ दिखाई देने लगा है। आलमट्टी (बसवेश्वर) जलाशय में जल आवक तेज होने के बाद बुधवार शाम से नारायणपुर स्थित बसवसागर जलाशय में 42 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे लंबे समय से पानी का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरों पर फिर उम्मीद लौट आई है।
आलमट्टी भराव की ओर
आलमट्टी जलाशय में बुधवार शाम तक जलस्तर 518.33 मीटर पहुंच गया, जो इसकी अधिकतम क्षमता से केवल 1.27 मीटर कम है। जलाशय में 102.563 टीएमसी पानी संग्रहित है, जो कुल क्षमता का 83.32 प्रतिशत है। जलाशय में 65,527 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज की गई, जबकि जलस्तर नियंत्रित रखने के लिए 42,500 क्यूसेक पानी कृष्णा नदी में छोड़ा जा रहा है।
बसवसागर में पहली बड़ी आवक
मानसून की कमजोर शुरुआत के कारण अब तक लगभग सूने पड़े नारायणपुर के बसवसागर जलाशय में इस मौसम की पहली बड़ी जल आवक दर्ज हुई है। आलमट्टी से छोड़े गए 42 हजार क्यूसेक पानी के पहुंचने से जलाशय में फिर से रौनक लौट आई है और सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता काफी हद तक कम हुई है।
किसानों को मिली राहत
जलाशय में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण सिंचाई निगम ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में सतर्क रहने की सलाह दी थी। अब जलस्तर बढऩे से विजयपुर, बागलकोट, बेलगावी, कलबुर्गी, रायचूर और यादगीर जिलों के कृष्णा ऊपरी परियोजना क्षेत्र के किसानों को समय पर नहरों में सिंचाई जल मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार जलाशय में वर्ष 2027 तक की पेयजल आवश्यकता के लिए भी पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है।
नदी किनारे सतर्क रहने की अपील
निडगुंदी के तहसीलदार ए.डी. अमरावदगी ने बताया कि नदी में पानी छोड़े जाने से कृष्णा का जलस्तर बढ़ सकता है। प्रशासन ने नदी तटीय क्षेत्रों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है तथा नागरिकों, किसानों और पशुओं को नदी किनारे या नदी के पात्र में नहीं जाने की अपील की है।
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