यादों में रहेगा शहर का पहला भोजनालय
राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के लिए ढहाई जाएगी ऐतिहासिक इमारत
शनिवार को ग्राहकों के लिए अंतिम दिन
बेल्तंगडी (दक्षिण कन्नड़)। दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्तंगडी नगर के बीचोंबीच पिछले 71 वर्षों से लोगों की भूख मिटाने वाला ऐतिहासिक गणेश कृपा होटल अब इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत होटल की इमारत को हटाया जाएगा। शनिवार (25 जुलाई) को होटल अंतिम बार ग्राहकों के लिए खुलेगा, जबकि रविवार से भवन हटाने का कार्य शुरू होगा।
वर्ष 1955 में स्थापित गणेश कृपा होटल को बेल्तंगडी का पहला होटल माना जाता है। शुद्ध शाकाहारी भोजन, पारंपरिक स्वाद, आत्मीय सेवा और सादगीपूर्ण माहौल के कारण यह दशकों तक स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले अधिकारियों, वकीलों, व्यापारियों और शिक्षकों का पसंदीदा ठिकाना बना रहा। आधुनिक सुविधाओं वाले नए होटलों के आने के बाद भी इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई।
सात दशक की विरासत
होटल की शुरुआत सदानंद प्रभु ने की थी। बाद में उनके भाई नरसिंह प्रभु ने संचालन संभाला और फिर उनके पुत्र दिवाकर प्रभु ने इसे आगे बढ़ाया। दिवाकर प्रभु के निधन के बाद पिछले तीन वर्षों से यहां 31 वर्षों तक कर्मचारी रहे शेखर शेट्टी होटल का संचालन कर रहे हैं। हाल के वर्षों में यह होटल स्थानीय लोगों के बीच शेट्र होटल के नाम से भी प्रसिद्ध हो गया था।
यादों का केंद्र रहा यह होटल
यह होटल केवल भोजनालय नहीं, बल्कि शहर के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा रहा। यहां वर्षों तक मित्रताएं बनीं, महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं और कई पीढिय़ों की यादें जुड़ीं। बेल्तंगडी से स्थानांतरित हो चुके अनेक अधिकारी भी शहर आने पर यहां का स्वाद लेने अवश्य पहुंचते थे।
भावुक हुए संचालक और ग्राहक
होटल संचालक शेखर शेट्टी ने कहा कि 31 वर्षों तक जिस होटल में काम किया, उसका इस तरह समाप्त होना बेहद भावुक क्षण है। यहां आने वाले पुराने ग्राहक आज भी उसी अपनत्व के साथ मिलते हैं।
वहीं नियमित ग्राहक मनोहर ने कहा कि आधुनिक होटलों की भीड़ में भी गणेश कृपा ने अपनी पुरानी पहचान और घरेलू माहौल कायम रखा। इसकी यादें हमेशा जीवित रहेंगी।
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