10 साल बाद आया फैसला, विशेष अदालत का बड़ा निर्णय
सजा पर कल होगी सुनवाई, विधायक पद पर संकट
बेंगलूरु. बहुचर्चित योगीश गौड़ा गौडर हत्याकांड में जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने बुधवार को यह महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया, जिससे कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
एक दशक बाद न्याय
करीब 10 वर्षों तक चली लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विनय कुलकर्णी समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराया है। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की गई थी। कोर्ट ने फैसला सुनाते ही आरोपियों को तत्काल हिरासत में लेने के निर्देश दिए, जिसके बाद कुलकर्णी को बेंगलूरु के परप्पन अग्रहार केंद्रीय कारागार भेजा गया। सजा की अवधि गुरुवार को सुनाई जाएगी।
2016 की सनसनीखेज हत्या
यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ के सप्तापुर स्थित उदय जिम में जिला पंचायत सदस्य योगीश गौड़ा गाडर पर सुबह के समय हमला किया गया था। हमलावरों ने पहले उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डाला और फिर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर उनकी हत्या कर दी। घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
जांच में बदलता रहा रुख
शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने इसे संपत्ति विवाद और व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला माना था और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। हालांकि, मृतक के परिवार ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। परिवार का आरोप था कि जिला पंचायत चुनाव में हार के चलते यह हत्या कराई गई।
सीबीआई जांच से खुली परतें
2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा के कार्यकाल में मामले को सीबीआई को सौंपा गया। सीबीआई जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और विनय कुलकर्णी को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया। 5 नवंबर 2020 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें सशर्त जमानत मिली थी।
विधायक पद पर मंडराया खतरा
कानून के अनुसार, यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाती है। चूंकि यह हत्या का मामला है, जिसमें सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है, ऐसे में विनय कुलकर्णी का विधायक पद जाना लगभग तय माना जा रहा है।
आगे का कानूनी विकल्प
सजा सुनाए जाने के बाद कुलकर्णी उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं। हालांकि, केवल जमानत मिलने से उनकी सदस्यता बहाल नहीं होगी। इसके लिए दोषसिद्धि पर रोक (स्टे) मिलना आवश्यक होगा।
राजनीतिक प्रभाव
इस फैसले का कर्नाटक की राजनीति पर व्यापक असर पडऩे की संभावना है। कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है।
10 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने न केवल पीडि़त परिवार को न्याय दिलाया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी एक नई बहस को जन्म दिया है। अब सबकी नजर गुरुवार को घोषित होने वाली सजा पर टिकी है।
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