हाईकोर्ट से कर्नाटक सरकार को झटका
तृतीय भाषा विषयों में ग्रेडिंग पर रोक
छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखकर अदालत का अहम निर्देश
हुब्बल्ली. कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2025-26 के एसएसएलसी परीक्षा में हिंदी सहित तृतीय भाषा विषयों के लिए ग्रेड के बजाय अंक देने का निर्देश देकर राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन विषयों में पारंपरिक अंक प्रणाली ही लागू करनी चाहिए।
अदालत का स्पष्ट निर्देश
न्यायाधीश ईएस. इंदिरेश की एकल पीठ ने चिक्कमगलूर की सहना आर. नायक समेत तीन छात्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में सरकार के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें 2025-26 से हिंदी और अन्य तृतीय भाषा विषयों में अंकों की जगह ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने की बात कही गई थी।
वकीलों ने रखा मजबूत पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आरवी. नायक ने तर्क दिया कि कर्नाटक स्कूल परीक्षा एवं मूल्यांकन बोर्ड (केएसईएबी) पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इन विषयों में 100 अंक होंगे 80 अंक लिखित परीक्षा और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के लिए। ऐसे में परीक्षा के दौरान नियम बदलना छात्रों के साथ अन्याय है।
प्रतियोगी परीक्षाओं पर असर की चिंता
अदालत में दलील दी गई कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) समेत बैंकिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ग्रेडिंग प्रणाली मान्य नहीं होती, केवल अंक ही मान्य होते हैं। ऐसे में ग्रेडिंग लागू होने से राज्य के छात्रों को भविष्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सरकार की दलील और कोर्ट की प्रतिक्रिया
सरकारी वकील ने बताया कि इस संबंध में अभी केवल मसौदा अधिसूचना जारी की गई है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाना चाहिए।
पहले खारिज हो चुकी थी जनहित याचिका
गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर दाखिल एक जनहित याचिका को मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ पहले ही खारिज कर चुकी थी और याचिकाकर्ताओं पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।
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