10 साल बाद कांग्रेस गठबंधन की सत्ता में वापसी तय, अब नजर ‘कौन बनेगा केरल का सीएम’ पर
तिरुवनंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव में करीब एक दशक के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने शानदार जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ दक्षिण भारत के पांच राज्यों में से तीन में कांग्रेस की सत्ता मजबूत होती दिखाई दे रही है।
हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस में तीन वरिष्ठ नेताओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है।
सीएम पद की दौड़ में कौन आगे?
इस रेस में के.सी. वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। तीनों ही नेता राज्य के प्रभावशाली नायर समुदाय से आते हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
के.सी. वेणुगोपाल, जो कांग्रेस हाईकमान में मजबूत पकड़ रखते हैं और राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं, संगठनात्मक क्षमता के लिए जाने जाते हैं। वहीं, वी.डी. सतीशन ने पिछले पांच वर्षों में विपक्ष के नेता के रूप में सरकार को मजबूती से घेरा और युवा वर्ग में लोकप्रियता हासिल की।
दूसरी ओर, रमेश चेन्निथला का लंबा राजनीतिक अनुभव और सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल उनकी बड़ी ताकत माना जा रहा है, हालांकि उम्र को लेकर चर्चा भी हो रही है।
यूडीएफ का दमदार प्रदर्शन
140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर स्पष्ट बहुमत की ओर कदम बढ़ा दिया है। यह 2001 के बाद कांग्रेस गठबंधन का सबसे शानदार प्रदर्शन माना जा रहा है। वहीं लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ), जो अब तक सत्ता में था, इस बार भारी नुकसान की ओर बढ़ता दिख रहा है।
राज्य में पिछले चुनावों के आंकड़े भी इस बार के बदलाव की पुष्टि करते हैं—2016 और 2021 में एलडीएफ ने लगातार जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार सत्ता विरोधी लहर ने समीकरण बदल दिए।
कम्युनिस्ट राजनीति को बड़ा झटका
केरल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही देश में वामपंथी राजनीति को बड़ा झटका लगा है। अब तक केरल ही वह राज्य था, जहां कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में थी। इस हार के साथ भारत में पहली बार ऐसी स्थिति बन सकती है, जब किसी भी राज्य में वामपंथी सरकार नहीं होगी।
अंतिम फैसला हाईकमान का
कांग्रेस परंपरा के अनुसार, पार्टी नेतृत्व द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक विधायकों की राय लेकर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय दिल्ली में लिया जाएगा। जिस नेता को अधिक विधायकों का समर्थन मिलेगा, वही केरल की सत्ता की कमान संभालेगा।
फिलहाल, यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है, और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा।
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