‘शिवम एसोसिएट्स’ संचालक शिवानंद नीलण्णवर पर हजारों लोगों से निवेश के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप
हुब्बल्ली. अवैध रूप से करोड़ों रुपए की जमा राशि एकत्र करने के आरोप में गिरफ्तार ‘शिवम एसोसिएट्स’ के मालिक शिवानंद नीलण्णवर की कहानी अब चर्चा का विषय बन गई है। कभी हुब्बल्ली की गलियों में ठेले पर आइसक्रीम बेचने वाला युवक आज बहुचर्चित निवेश घोटाले का मुख्य आरोपी बन चुका है।
मूल रूप से हुब्बल्ली के उणकल गांव स्थित दुर्गद ओणी का रहने वाला शिवानंद एक साधारण परिवार से था। उसके पिता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद केईबी विभाग में वाहन चालक के रूप में कार्यरत थे। बाद में उनका निधन हो गया। पिता की नौकरी शिवानंद के भाई को मिली और तब पूरा परिवार बेलगावी जाकर बस गया।
आइसक्रीम बेचने से निवेश कारोबार तक
द्वितीय पीयूसी तक पढ़ाई करने वाले शिवानंद ने वर्ष 2004 से 2006 के बीच हुब्बल्ली की गलियों में हाथगाड़ी पर आइसक्रीम बेचकर जीवनयापन शुरू किया था। बाद में उसने कुछ वर्षों तक कोटक महिंद्रा इंश्योरेंस कंपनी में भी काम किया।
इसके बाद वर्ष 2012 में उसने शेयर बाजार में निवेश शुरू किया, लेकिन वहां सफलता नहीं मिलने पर खुद की निवेश संस्था शुरू करने का विचार बनाया। उसने ‘अक्यूमेन’ नामक ऐप विकसित कर लोगों से निवेश जुटाना शुरू किया। बताया जा रहा है कि इस ऐप के जरिए हजारों करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जिसमें हुब्बल्ली के लोगों की भी करोड़ों रुपए की रकम शामिल है।
35 हजार लोगों से जमा कराया पैसा
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि शिवानंद नीलण्णवर ने करीब 35 हजार लोगों से भारी रकम जमा करवाई थी। हालांकि वास्तविक संख्या और निवेश राशि की जांच अभी जारी है। आरोप है कि उसने लोगों को अधिक ब्याज का लालच देकर अपनी योजना में पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया।
निवेशकों में डर का माहौल
शिवानंद की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों में भय का माहौल है। कई लोग इस डर से खुलकर सामने नहीं आ रहे कि कहीं आयकर विभाग, ईडी या पुलिस उनसे भी पूछताछ न करे।
बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त सैनिकों, किसानों और आम नागरिकों ने अधिक मुनाफे की उम्मीद में अपनी जीवनभर की बचत उसके पास जमा कर दी थी। अब सभी को अपनी जमा पूंजी डूबने की चिंता सता रही है।
पिता की पहचान का उठाया फायदा
स्थानीय लोगों के अनुसार शिवानंद के पिता सेना और केईबी विभाग में कार्यरत रहने के कारण सेवानिवृत्त सैनिकों और बिजली विभाग कर्मचारियों के बीच अच्छी पहचान रखते थे। आरोप है कि शिवानंद ने इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए लोगों को ऊंचे ब्याज का लालच देकर निवेश करवाया।
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