“हमारी मांगें पूरी करें, वरना संघर्ष और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे”
हुब्बल्ली. कर्नाटक की विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने राज्य की सत्तारूढ़ सिद्धरामय्या सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि मुस्लिम समुदाय की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठनों ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस की जीत में मुस्लिम समुदाय की बड़ी भूमिका रही है, इसलिए उनकी मांगों को सुनना और लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है।
बेंगलूरु के पुर भवन में शनिवार को 40 मुस्लिम संगठनों के संयुक्त मंच ‘कर्नाटक राज्य मुस्लिम संगठन महासंघ’ की ओर से आयोजित सम्मेलन में यह संदेश सरकार तक पहुंचाया गया। इस दौरान “कांग्रेस सरकार ने क्या कहा, क्या किया और आगे क्या करेगी” शीर्षक से रिपोर्ट तथा मांगपत्र जारी कर समयबद्ध तरीके से उन्हें लागू करने की मांग की गई।
वोट देने वालों को सवाल पूछने का अधिकार
मुस्लिम नेता यासीन मलपे ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में बैठाने वाले लोगों को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। सम्मेलन में शामिल हर नेता के पीछे सैकड़ों समर्थक और मतदाता हैं, जो कांग्रेस सरकार के रवैये से निराश हैं और चुनावी वादों का हिसाब मांग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार के कार्यकाल के अभी दो वर्ष शेष हैं और यह सम्मेलन कांग्रेस को उसके वादे याद दिलाने के लिए आयोजित किया गया है।
सम्मेलन के संचालक सुहैल अहमद ने इसे समुदाय के अधिकारों और अस्मिता की लड़ाई बताया।
कॉलमिस्ट शिवसुंदर ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने खुले तौर पर संविधान बदलने की बात कही थी। उन्होंने चेतावनी दी कि सहअस्तित्व और भाईचारे के बिना देश का भविष्य सुरक्षित नहीं रह सकता।
मुस्लिम संगठनों की प्रमुख मांगें
2बी आरक्षण बहाल करने से लेकर वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा तक उठी मांग
सम्मेलन में सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी गईं।
मुसलमानों के खिलाफ घृणा भाषण और घृणा अपराध करने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
भाजपा सरकार द्वारा समाप्त किया गया 2बी आरक्षण दोबारा लागू करना चाहिए।
गोहत्या निषेध और धर्मांतरण विरोधी कानून वापस लिए जाएं।
मुस्लिम समुदाय को जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक और संस्थागत प्रतिनिधित्व दिया जाए।
मुस्लिम समुदाय के लिए घोषित एक हजार करोड़ रुपए की सहायता राशि तुरंत जारी की जाए।
वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और वक्फ संशोधन कानून का प्रभावी विरोध किया जाए।
जातीय जनगणना रिपोर्ट तुरंत लागू की जाए।
मौलाना आजाद स्कूलों की स्थिति सुधारी जाए और मुस्लिम छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं दी जाएं।
एसआईआर लागू नहीं किया जाए।
हिजाब प्रतिबंध हटाने में देरी पर भी नाराजगी
“भाजपा ने एक दिन में प्रतिबंध लगाया, कांग्रेस को तीन साल क्यों लगे?”
सम्मेलन में शामिल मुस्लिम नेताओं ने स्कूल-कॉलेजों में हिजाब प्रतिबंध हटाने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन इसे लागू करने में हुई देरी पर सरकार को घेरा। नेताओं ने सवाल किया कि यदि भाजपा सरकार एक दिन में हिजाब प्रतिबंध लागू कर सकती थी, तो कांग्रेस सरकार को उसे हटाने में तीन वर्ष क्यों लग गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम संगठनों द्वारा सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा के बाद ही सरकार ने इस दिशा में निर्णय लिया।
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