प्रेम संबंध और सोशल मीडिया को माना जा रहा बड़ा कारण
रोकथाम के लिए सरकार ने बढ़ाए कदम
हुब्बल्ली. कर्नाटक में बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगाने के प्रयासों के बावजूद यह समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में राज्य में 2285 बाल विवाह के मामले दर्ज किए गए हैं। विभाग ने किशोरों में बढ़ते प्रेम संबंधों, सोशल मीडिया के प्रभाव और कुछ समुदायों में अब भी जारी पुरानी सामाजिक परंपराओं को इसका प्रमुख कारण बताया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में 830, वर्ष 2024 में 804 और वर्ष 2025 में 650 बाल विवाह के मामले सामने आए। हालांकि इसी अवधि में प्रशासन ने हजारों बाल विवाह रुकवाने में भी सफलता हासिल की है। वर्ष 2023 में 1775, वर्ष 2024 में 3127 और वर्ष 2025 में 3044 बाल विवाह प्रयासों को रोका गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि वर्तमान कानून में केवल बाल विवाह के प्रयास या सगाई के आधार पर सीधे मामला दर्ज करने में कानूनी कठिनाई आती है। इसे दूर करने के लिए ‘बाल विवाह निषेध (कर्नाटक संशोधन)-2025’ लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे ऐसे प्रयासों को भी अपराध की श्रेणी में लाया जा सके।
जागरूकता और निगरानी पर जोर
सरकार ने बाल विवाह और बाल गर्भधारण रोकने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को जिला और तालुक स्तर पर प्रशिक्षण देने की योजना बनाई है। बच्चों की सहायता के लिए 24 गुणा 7 ‘चाइल्ड हेल्पलाइन-1098’ सक्रिय है, जहां सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी तुरंत कार्रवाई करते हैं।
ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा समितियां बनाई गई हैं, जबकि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला बाल संरक्षण समितियां हर तीन महीने में मामलों की समीक्षा कर रही हैं। इसके अलावा प्रत्येक जिले में बाल कल्याण समिति, विशेष पुलिस इकाई और बाल संरक्षण केंद्र सक्रिय हैं।
पीडि़त बालिकाओं को स्वास्थ्य जांच के लिए एकमुश्त 6 हजार रुपए की सहायता तथा शिक्षा जारी रखने पर 18 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 4 हजार रुपए दिए जाएंगे। साथ ही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाइ) के तहत पीडि़ता और उसके नवजात को 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा भी उपलब्ध कराया जाएगा।
राज्य सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों और प्रशिक्षण संस्थानों में बाल अधिकार, पोक्सो कानून, बाल विवाह रोकथाम और हेल्पलाइन 1098 के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए सात विभागों की संयुक्त कार्ययोजना भी लागू की है।
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