‘आरएसएस पर सवाल उठाओ तो भाजपा फुफकारने लगती है’प्रियांक खरगे।

प्रियांक खरगे का नया हमला

आरएसएस पंजीकरण विवाद पर फिर गरमाई सियासत

भाजपा को ‘आरएसएस का साधन’ बताते हुए सोशल मीडिया पोस्ट से साधा निशाना

हुब्बल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने एक बार फिर सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने भाजपा की तुलना फुफकारते सर्प से करते हुए कहा कि आरएसएस पर सवाल उठते ही भाजपा अपनी संतुलित प्रतिक्रिया खो देती है।

आरएसएस पर सवाल, भाजपा की बेचैनी!

प्रियांक खरगे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि आरएसएस से स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान, तिरंगा फहराने में हुई देरी, संविधान के प्रति उसकी प्रतिबद्धता, पंजीकरण और कर भुगतान जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे जाते हैं तो भाजपा तुरंत प्रतिक्रिया देने लगती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केवल आरएसएस की सहयोगी नहीं, बल्कि उसका एक राजनीतिक उपकरण रही है। खरगे ने कहा कि भाजपा की हर प्रतिक्रिया यह साबित करती है कि उसकी राजनीतिक दिशा किसके हाथों में है।

संविधान और राष्ट्रवाद पर भी उठाए प्रश्न

पोस्ट में प्रियांक खरगे ने सवाल उठाया कि आरएसएस की निष्ठा वास्तव में किस संविधान के प्रति है—डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान के प्रति या उस वैकल्पिक व्यवस्था के प्रति, जिसकी कल्पना वह स्वयं करता रहा है।

उन्होंने पूछा कि आरएसएस स्वयं को औपचारिक रूप से पंजीकृत कराने और कर भुगतान जैसे विषयों पर स्पष्टता क्यों नहीं देता।

जिगजिणगी की टिप्पणी पर दिया था जवाब

इस विवाद की शुरुआत तब और तेज हुई जब सांसद रमेश जिगजिणगी ने प्रियांक खरगे की आलोचना करते हुए कहा था कि आरएसएस के खिलाफ खड़े होने वालों का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित नहीं रहता। उन्होंने यह भी कहा था कि खरगे को अपने मंत्री पद की जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।

इसके जवाब में प्रियांक खरगे ने पलटवार करते हुए पूछा था कि क्या दलित समाज के लोगों को आरएसएस पर सवाल पूछने का अधिकार नहीं है।

‘विषधर’ टिप्पणी से भी बढ़ा विवाद

हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आरएसएस की तुलना ‘विषैले सांप’ से किए जाने पर भी विवाद खड़ा हुआ था। उस दौरान प्रियांक खरगे ने कहा था कि यदि आरएसएस को आपत्ति है तो वह औपचारिक शिकायत दर्ज कराए, लेकिन इसके लिए संगठन को अपने वैध पंजीकरण और आधिकारिक लेटरहेड का उपयोग करना चाहिए।

राजनीतिक टकराव जारी

आरएसएस के पंजीकरण, उसकी वैधानिक स्थिति और वैचारिक भूमिका को लेकर कांग्रेस तथा भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। प्रियांक खरगे की ताजा टिप्पणी ने इस राजनीतिक विवाद को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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