बारिश के अभाव से फसलें सूखने लगीं, किसानों ने मुआवजा और रियायती बीज-उर्वरक उपलब्ध कराने की मांग उठाई
यादगीर. जिले में लगातार बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। पिछले एक सप्ताह से आसमान में बादल छाए रहने के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। फसलों के सूखने की आशंका के बीच किसान संगठनों ने सरकार से जिले को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित कर राहत पैकेज जारी करने की मांग की है।
45 प्रतिशत बुवाई के बाद बढ़ी चिंता
कल्याण कर्नाटक क्षेत्र का कृषि प्रधान जिला यादगीर इस बार भी मानसून की अच्छी शुरुआत की उम्मीद में किसानों ने कपास, अरहर और मूंग सहित विभिन्न फसलों की बुवाई की थी। सीमित बारिश के बावजूद जिले में करीब 45 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन अब पर्याप्त बारिश नहीं होने से फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है और उनके सूखने का खतरा बढ़ गया है।
महंगे बीज और खाद खरीद चुके हैं किसान
किसानों ने बुवाई के लिए महंगे बीज और रासायनिक उर्वरकों पर हजारों रुपए खर्च किए हैं। जून बीतने और जुलाई का पहला सप्ताह गुजर जाने के बाद भी अच्छी बारिश नहीं होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
राहत पैकेज की मांग
किसान संगठनों ने राज्य सरकार से जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर फसल नुकसान का सर्वे कराने, किसानों को उचित मुआवजा देने तथा बीज और उर्वरक नि:शुल्क या रियायती दर पर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर राहत नहीं मिलने पर किसानों की आर्थिक स्थिति और अधिक संकटपूर्ण हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर खरीफ फसलों का उत्पादन गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है। ऐसे में किसानों को राहत पहुंचाने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाना बेहद जरूरी होगा।
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