गदग के बूदीश्वर मठ में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
लोककल्याण और अच्छी बारिश के लिए तपस्या का दावा
गदग. जिले के अंतूर-बेंतूर गांव स्थित बूदीश्वर मठ के पीठाधीश्वर राचोटेश्वर स्वामी ने 33 दिनों की शिवयोग समाधि और मौन साधना पूर्ण करने के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। उनके मठ से बाहर आते ही “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
33 दिन की मौन साधना
मठ के अनुसार, राचोटेश्वर स्वामी 3 जून की मध्यरात्रि विशेष रूप से निर्मित पत्थर के कक्ष में प्रवेश कर शिवलिंग के समक्ष शिवयोग समाधि एवं मौन साधना में लीन हुए थे। मठ का दावा है कि यह अनुष्ठान विश्व शांति, जनकल्याण, अच्छी बारिश, किसानों की समृद्धि तथा महादयी परियोजना के सफल क्रियान्वयन की कामना के लिए किया गया।
श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब
शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे विभिन्न मठों के संतों, धर्मगुरुओं और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में स्वामी समाधि कक्ष से बाहर आए। गदग, धारवाड़, बागलकोट, कोप्पल, हावेरी, यादगीर, बल्लारी तथा तेलंगाना सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। पूरे गांव में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
मठ का दावा, वैज्ञानिक पुष्टि नहीं
मठ और श्रद्धालुओं का दावा है कि स्वामी ने लगभग 775 घंटे तक बिना भोजन, पानी और बाहरी संपर्क के तपस्या की। स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद उन्होंने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया।
हालांकि, इस प्रकार के दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। धार्मिक आस्था के आधार पर श्रद्धालु इसे असाधारण आध्यात्मिक साधना मान रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ ऐसे दावों के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और सत्यापन की आवश्यकता बताते हैं।
श्रद्धालुओं ने कहा कि स्वामी को स्वस्थ अवस्था में देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। मठ प्रशासन के अनुसार, राचोटेश्वर स्वामी पूर्व में भी शिवयोग साधना कर चुके हैं, लेकिन 33 दिनों की यह सबसे लंबी समाधि साधना थी।
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