आत्मीय व्यवहार से बनती है पहचान
मोटेबेन्नूर में साध्वीवृंद का प्रेरक प्रवचन
हावेरी के लिए किया विहार
मोटेबेन्नूर. समाज में व्यक्ति की पहचान उसके नाम से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार से होती है। इसी संदेश के साथ साध्वी भव्यगुणा ने अपने प्रवचन में आत्मीयता और सद्व्यवहार के महत्व पर प्रकाश डाला।
व्यवहार ही बनाता है जीवन की छवि
साध्वी भव्यगुणा ने कहा कि हर व्यक्ति अपने व्यवहार से एक छवि निर्मित करता है, और समाज उसी छवि के आधार पर उसे पहचानता है। मनुष्य का नाम चाहे कितना ही सुंदर क्यों न हो, यदि उसके व्यवहार में आत्मीयता नहीं है तो उसकी पहचान अधूरी रह जाती है। व्यक्ति का आचरण ही उसे जीवन में सम्मान दिलाता है और मृत्यु के बाद भी उसी रूप में उसे याद किया जाता है।
उन्होंने कहा कि रूप, धन या पद से अधिक महत्वपूर्ण आत्मीयता है। यदि व्यवहार में अपनापन नहीं है, तो बाहरी आकर्षण का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। आत्मीयता ऐसा गुण है, जो शत्रु को भी मित्र बना सकता है, जबकि इसके अभाव में मित्र भी शत्रु बन सकते हैं।
मधुर वाणी: वरदान भी, अभिशाप भी
साध्वी शीतलगुणा ने वाणी की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि मनुष्य की वाणी उसके लिए वरदान भी है और अभिशाप भी। मधुर वचन औषधि के समान होते हैं, जो लोगों के हृदय को शांति देते हैं, जबकि कटु वचन तीर की तरह चोट पहुंचाते हैं।
श्रद्धालुओं ने लिया विहार सेवा का लाभ
इस अवसर पर विहार सेवा का लाभ राजेश जैन, मिथुन जैन, जयंतीलाल जैन और हुकमीचंद बागरेचा ने प्राप्त किया। साध्वीवृंद शुक्रवार को हावेरी के लिए विहार करेंगे।
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