किराए के कमरे में चल रही पुलिस चौकीसिरिगेरे पुलिस उपचौकी।

चार वर्ष से भवनविहीन सिरिगेरे पुलिस उपचौकी में लॉकअप, शौचालय और स्टाफ आवास तक नहीं

ग्रामीणों ने डीएमएफ निधि से नया भवन बनाने की मांग उठाई

चित्रदुर्ग. लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सिरिगेरे पुलिस उपचौकी स्वयं बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। चार वर्ष पहले जर्जर भवन और पुलिस आवासों को ध्वस्त किए जाने के बाद से उपचौकी किराए के एक छोटे से भवन में संचालित हो रही है। आज तक नए भवन का निर्माण नहीं होने से पुलिसकर्मियों को सीमित संसाधनों में ड्यूटी निभानी पड़ रही है।

एक कमरे में पूरा थाना

करीब 30 से 32 गांवों की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली इस उपचौकी में एक प्रधान आरक्षी समेत तीन पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पद सात हैं। वर्तमान भवन में केवल एक कमरा और एक हॉल है। शिकायत दर्ज करने, अभिलेख रखने, जांच, कंप्यूटर संचालन और हथियारों के रखरखाव जैसे सभी कार्य इसी सीमित स्थान से किए जाते हैं। लॉकअप नहीं होने के कारण आरोपियों को दूसरे थानों में भेजना पड़ता है। शौचालय, प्रतीक्षालय और विश्राम कक्ष जैसी न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

पुलिसकर्मी भी किराए के मकानों में रहने को मजबूर

पुराने पुलिस आवास भी वर्षों पहले जर्जर होने के कारण हटा दिए गए थे। नए आवास नहीं बनने से अधिकांश पुलिसकर्मी निजी किराए के मकानों में रहने को विवश हैं। बरसात के दिनों में मौजूदा भवन में पानी टपकने की समस्या भी सामने आती है।

ग्रामीणों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले पुलिसकर्मियों को पहले सुरक्षित और सुविधाजनक कार्यस्थल उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे प्रभावी ढंग से कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा सकें।

ग्रामीणों ने उठाई डीएमएफ निधि से निर्माण की मांग

पूर्व ग्राम पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेता के.एन.बी. मोहन ने कहा, खनन क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) निधि से सिरिगेरे पुलिस उपचौकी, पुलिस आवास और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कराना चाहिए। इस संबंध में ग्रामीण जल्द ही जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपेंगे।

चित्रदुर्ग के पुलिस अधीक्षक रंजीत कुमार बंडारू ने कहा कि सिरिगेरे में नए पुलिस थाना भवन के निर्माण का फिलहाल विभाग के समक्ष कोई प्रस्ताव नहीं है। नए भवन के लिए कोई योजना या बजट भी स्वीकृत नहीं हुआ है। हालांकि, ग्रामीणों की मांग जिला प्रशासन तक पहुंचा दी गई है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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