जूनोटिक रोगों से बचाव के लिए सतर्क रहें: डॉ. परशुरामविश्व जूनोटिक दिवस के अवसर पर जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम का उद्घाटन करते जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. परशुराम एफ.के.।

विश्व जूनोटिक दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम

पशुओं के टीकाकरण और स्वच्छता अपनाने की अपील

धारवाड़. विश्व जूनोटिक दिवस के अवसर पर जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में लोगों से पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले संक्रामक रोगों के प्रति सतर्क रहने और आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाने का आह्वान किया गया। इस वर्ष दिवस की थीम “एक विश्व, एक स्वास्थ्य : जूनोटिक रोगों की रोकथाम” रखी गई है।

60 प्रतिशत संक्रामक रोग पशुजनित

जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. परशुराम एफ.के. ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार मनुष्यों में होने वाले 60 प्रतिशत से अधिक संक्रामक रोग पशुजनित होते हैं। रेबीज, डेंगू, मंकी फीवर और कोविड-19 जैसे रोग इसके प्रमुख उदाहरण हैं। मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा है, इसलिए सभी को जागरूक रहना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर द्वारा 6 जुलाई 1885 को रेबीज की पहली सफल वैक्सीन विकसित किए जाने की स्मृति में प्रत्येक वर्ष विश्व जूनोटिक दिवस मनाया जाता है।

स्वच्छता और टीकाकरण पर जोर

जिला सर्वेक्षण अधिकारी डॉ. महेश एन. चित्तरगी ने कहा कि पशुओं को छूने के बाद हाथ अच्छी तरह धोना तथा पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना जूनोटिक रोगों की रोकथाम के प्रभावी उपाय हैं। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इन रोगों की रोकथाम, पहचान और नियंत्रण पर व्याख्यान दिए। इसमें स्वास्थ्य एवं पशुपालन विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों और कर्मचारियों ने भाग लिया।

 

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By Bharat Ki Awaz

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