ब्रेन डेड मरीज के परिजनों ने दिखाई मानवता
पुलिस और चिकित्सकों की तत्परता से समय पर पहुंचाए गए अंग
बागलकोट. सडक़ दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होकर ब्रेन डेड घोषित किए गए एक व्यक्ति के परिजनों ने अंगदान का निर्णय लेकर मानवता की मिसाल पेश की। परिवार की सहमति, चिकित्सकों की तत्परता और पुलिस द्वारा बनाए गए जीरो ट्रैफिक कॉरिडोर की बदौलत अंगों को समय पर बेलगावी पहुंचाया जा सका, जिससे कई मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद लिया गया निर्णय
मुधोल तालुक के जुन्नूर गांव के 58 वर्षीय व्यक्ति दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। सिर में गहरी चोट लगने के बाद उसे बागलकोट स्थित एचएसके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने वेंटिलेटर पर रखकर उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन जांच के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
इसके बाद डॉक्टरों ने परिजनों को अंगदान के महत्व की जानकारी दी। परिवार ने बिना किसी हिचकिचाहट के अंगदान के लिए सहमति दे दी।
समय से अंग पहुंचाने के लिए बना ग्रीन कॉरिडोर
अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया समयबद्ध होने के कारण मरीज को तत्काल बेलगावी के केएलई अस्पताल ले जाना आवश्यक था। अस्पताल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एवं मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. नवीन वी. चरंतिमठ ने बागलकोट पुलिस से सहायता मांगी। जिला पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ गोयल के निर्देश पर बागलकोट से बेलगावी तक एंबुलेंस के लिए जीरो ट्रैफिक व्यवस्था की गई, जिससे अंगों का सुरक्षित और त्वरित परिवहन संभव हो सका।
मानवीय पहल की सराहना
इस प्रेरणादायी पहल के लिए मृतक के परिजनों, चिकित्सकों और पुलिस विभाग की विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के पदाधिकारियों ने सराहना की। उन्होंने कहा कि अंगदान किसी व्यक्ति के जीवन का अंतिम लेकिन सबसे बड़ा मानवीय उपहार है, जो अनेक जरूरतमंदों को नया जीवन प्रदान कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग समय पर दान किए जाएं तो कई गंभीर मरीजों का जीवन बचाया जा सकता है। यह घटना समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानवीय मूल्यों को सशक्त करने वाली प्रेरक मिसाल बन गई है।
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