फसल बीमा बना मजाक, किसानों के खाते में पहुंचे 17 से 25 रुपएफसल बीमा।

मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे 1,200 से अधिक किसानों को झटका

प्रशासन और बीमा कंपनी की भूमिका पर उठे सवाल, जांच की मांग

कलबुर्गी। पिछले वर्ष फसल नुकसान के बाद बीमा मुआवजे से राहत की उम्मीद लगाए बैठे कलबुर्गी जिले के किसानों को अंतिम किस्त जारी होने पर भारी निराशा हाथ लगी है। अफजलपुर तालुक के अतनूर और बोगनल्ली गांवों के अनेक किसानों के बैंक खातों में प्रति एकड़ मात्र 17 से 25 रुपए तथा कई किसानों को केवल 20 से 100 रुपए तक की राशि जमा होने से आक्रोश फैल गया है। किसानों ने इसे बीमा योजना का मजाक बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

1,200 से अधिक किसानों को झटका

अतनूर और बोगनल्ली गांवों के 1,200 से अधिक किसानों ने गत वर्ष नियमित रूप से फसल बीमा प्रीमियम जमा कराया था। अब अंतिम मुआवजा जारी होने पर अधिकांश किसानों के खातों में बेहद मामूली राशि पहुंची है। किसानों का कहना है कि जिस मुआवजे से नुकसान की भरपाई की उम्मीद थी, वह नाममात्र की रकम बनकर रह गया है।

पड़ोसी गांवों को हजारों रुपए, यहां सिर्फ चंद रुपए

किसानों का दावा है कि अफजलपुर तालुक के अन्य गांवों में कई किसानों को कम से कम 5,000 रुपए का मुआवजा मिला है, जबकि अतनूर और बोगनल्ली में फसल का नुकसान अपेक्षाकृत अधिक हुआ था। इतना ही नहीं, इन गांवों में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या भी अधिक थी। इसके बावजूद अत्यंत कम मुआवजा मिलने से किसानों में असंतोष व्याप्त है।

प्रशासनिक लापरवाही या बीमा कंपनी की गलती?

किसानों ने आरोप लगाया कि पड़ोसी ग्राम पंचायतों में फसल कटाई प्रयोग (सीसीइ) सही तरीके से किए गए, जबकि उनके गांवों में प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि कम मुआवजे के लिए प्रशासनिक लापरवाही जिम्मेदार है या बीमा कंपनी की त्रुटि।

किसानों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, वास्तविक फसल नुकसान का पुनर्मूल्यांकन करने तथा पात्र किसानों को उचित फसल बीमा मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे।

 

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By Bharat Ki Awaz

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