बेल्लारे साप्ताहिक बाजार में पार्किंग संकटबेल्लारे साप्ताहिक बाजार।

जाम और हादसों का बढ़ा खतरा

व्यवस्थित वाहन पार्किंग के अभाव में हर शनिवार परेशान होते हैं हजारों लोग

नए बाजार से स्थायी समाधान की उम्मीद

सुल्या (दक्षिण कन्नड़)। सुल्या तालुक के दूसरे सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्र बेल्लारे में प्रत्येक शनिवार लगने वाले साप्ताहिक बाजार में पार्किंग की समुचित व्यवस्था न होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार के समीप मोड़ वाली सडक़ के दोनों ओर वाहन खड़े होने से यातायात बाधित हो रहा है और दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हर सप्ताह सैकड़ों किसान, व्यापारी और खरीदार यहां पहुंचते हैं, लेकिन पार्किंग की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

तंग बाजार, सडक़ पर कारोबार

नगर के मध्य स्थित वर्तमान बाजार में जगह की भारी कमी है। बाजार परिसर में सीमित व्यापारियों को ही स्थान मिल पाता है, जबकि अधिकांश विक्रेता सडक़ किनारे तिरपाल लगाकर दुकानें सजाते हैं। ऐसे में व्यापारी और ग्राहक अपने वाहन सडक़ के दोनों ओर खड़े करने को मजबूर हो जाते हैं। सडक़ पर तीखा मोड़ होने के कारण सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे बाजार के दिन जाम और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

पांच दशक पुराना बाजार

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार वर्ष 1980 के आसपास पुड्कजे भास्कर राय के प्रयासों से इस साप्ताहिक बाजार की शुरुआत हुई थी। पहले यह बाजार केएसआरटीसी बस स्टैंड के पास लगता था, लेकिन तीन-चार वर्ष पहले इसे पुराने ग्राम पंचायत भवन के नीचे स्थित नए एपीएमसी यार्ड में स्थानांतरित किया गया। हालांकि नई जगह अपेक्षाकृत छोटी होने के कारण समस्याएं और बढ़ गई हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

बेल्लारे, पेरुवाजे, कोडियाल, पाल्ताडी, कलंज, कल्मडका, बालिल, मुरुल्य सहित 12 से अधिक गांवों के किसान और व्यापारी यहां अपनी उपज सीधे ग्राहकों को बेचते हैं। यह बाजार ग्रामीण किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। यहां ताजी सब्जियों के अलावा घाट क्षेत्र से आने वाली सब्जियां, इमली, आटी माह के विशेष केसू पत्ते, बेकरी उत्पाद, सूखी मछली और अन्य घरेलू सामान भी उपलब्ध रहते हैं। सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक यहां व्यापारिक गतिविधियां चलती हैं।

नए बाजार से समाधान की उम्मीद

ग्राम पंचायत के अनुसार बाजार में 50 से अधिक स्टॉल हैं और प्रत्येक सप्ताह लाखों रुपए का कारोबार होता है। पंचायत स्टॉलों से 100 से 500 रुपए तक किराया भी वसूलती है।

पार्किंग संकट को दूर करने के लिए पुराने अस्पताल परिसर में लगभग 4.50 लाख रुपए की लागत से नए बाजार का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद साप्ताहिक बाजार को वहां स्थानांतरित करने की योजना है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पर्याप्त पार्किंग और बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाला नया बाजार शुरू होने पर वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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