बरसात में भी नहीं घटी बिजली की मांग, कर्नाटक में रोज 300 मिलियन यूनिट खपतरायचूर तापीय विद्युत स्टेशन।

कम बारिश से बढ़ी बिजली की जरूरत

उत्पादन बनाए रखने के लिए कोयले की अतिरिक्त आपूर्ति पड़ सकती है

रायचूर। कर्नाटक में मानसून शुरू हुए दो महीने बीत जाने के बावजूद बिजली की मांग में अपेक्षित कमी नहीं आई है। राज्य में इन दिनों प्रतिदिन लगभग 300 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हो रही है, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य से कम वर्षा होने के कारण कृषि पंपसेट, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग अपेक्षा से अधिक हो रहा है, जिससे मांग लगातार ऊंची बनी हुई है।

200-220 से बढक़र 300 मिलियन यूनिट पहुंची खपत

आमतौर पर मानसून के दौरान तापमान में गिरावट और पर्याप्त वर्षा के कारण बिजली की मांग घट जाती है। पिछले वर्ष इसी अवधि में राज्य में प्रतिदिन 200 से 220 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती थी, लेकिन इस बार यह बढक़र लगभग 300 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए तापीय, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा सहित सभी उपलब्ध स्रोतों से अधिकतम उत्पादन किया जा रहा है।

तापीय संयंत्रों पर बढ़ा दबाव

रायचूर तापीय विद्युत स्टेशन (आरटीपीएस) की 1,720 मेगावाट क्षमता वाली आठ इकाइयों में से फिलहाल पांच इकाइयां संचालित हैं, जबकि एक इकाई 6 अगस्त से पुन: शुरू होने वाली है और दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। वर्तमान में यहां से करीब 1,090 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। संयंत्र में लगभग 1.70 लाख टन कोयले का भंडार उपलब्ध है, जो 10 से 11 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है।

वहीं, वाइटीपीएस की 800-800 मेगावाट क्षमता वाली दो इकाइयों में से एक वार्षिक रखरखाव के कारण बंद है, जबकि दूसरी से उत्पादन जारी है। यहां करीब 2 लाख टन कोयले का भंडार है, जो लगभग 12 दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

मांग बनी रही तो बढ़ानी होगी कोयले की आपूर्ति

राज्य में सौर और पवन ऊर्जा से भी लगभग 7,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके बावजूद यदि बिजली की मांग इसी स्तर पर बनी रहती है, तो तापीय बिजलीघरों के लिए अतिरिक्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में मांग और उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

प्रतिदिन लगभग 300 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन

इस वर्ष राज्य में अपेक्षित वर्षा नहीं हुई है। मानसून शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मौसम में सामान्य बदलाव नहीं दिखा। पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार बरसात के मौसम में बिजली की मांग सबसे अधिक रही है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से प्रतिदिन लगभग 300 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर राज्य में आपूर्ति की जा रही है।
रमेश एच.आर., कार्यकारी निदेशक, आरटीपीएस, शक्तिनगर

 

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By Bharat Ki Awaz

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