गोलीयंगडी में हर रविवार राज्य राजमार्ग पर बाजार
न शेड, न शौचालय, न पेयजल
जाम और हादसों का खतरा
उडुपी। कुंदापुर तालुक का तीसरा सबसे बड़ा साप्ताहिक हाट कहलाने वाला गोलीयंगडी बाजार आज भी बदहाल व्यवस्था के बीच चल रहा है। हर रविवार यहां बयंदूर-विराजपेट राज्य राजमार्ग के दोनों ओर बाजार सजता है। बाजार शुल्क से सालाना करीब 1.65 लाख रुपए की आय होने के बावजूद व्यापारियों और ग्राहकों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
राजमार्ग पर ही दुकानें लगने से बाजार के दिन यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है। वाहनों की आवाजाही और भीड़ के बीच कई बार दुर्घटनाएं होती हैं तथा जाम की स्थिति बनती है। बारिश के दौरान समस्या और गंभीर हो जाती है। कीचड़ और गंदे पानी के बीच खड़े होकर व्यापार करने तथा खरीदारी करने की मजबूरी रहती है।
मछली बाजार नहीं, सडक़ पर बहता गंदा पानी
बाजार में दूर-दराज के इलाकों से आने वाले व्यापारियों के लिए शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। मछली बिक्री के लिए अलग स्थान नहीं होने से मछली धोने का गंदा पानी सडक़ पर बहता है। ग्राहकों को इसी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। व्यापारियों के लिए न बारिश से बचने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही सामान सुरक्षित रखने की सुविधा।
स्कूल की जमीन पर बाजार बसाने की तैयारी
गोलीयंगडी बाजार के पास बेल्वे सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की करीब तीन एकड़ जमीन है। विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण विद्यालय के केपीएस में विलय की प्रक्रिया चल रही है। इसी जमीन में से डेढ़ एकड़ बाजार के लिए देने का प्रस्ताव पहले भी सामने आ चुका है।
बेल्वे ग्राम पंचायत और एसडीएमसी ने पूर्व विधायक हालाड़ी श्रीनिवास शेट्टी के कार्यकाल में डेढ़ एकड़ जमीन बाजार के लिए देने का प्रस्ताव पारित कर तत्कालीन शिक्षा मंत्री बी.सी. नागेश को भेजा था। अब एक बार फिर इस जमीन पर बाजार विकसित करने की मांग उठ रही है।
70 साल पुराना है बाजार
गोलीयंगडी साप्ताहिक हाट करीब 70 वर्ष पुराना है। बाजार की स्थापना को लेकर उस समय बेल्वे और हिलियाणा गांवों के बीच काफी खींचतान हुई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन बेल्वे अध्यक्ष नारायण शेट्टी ने तत्कालीन दक्षिण कन्नड़ जिलाधिकारी को गोलीयंगडी बुलाकर बाजार यहीं लगाने की व्यवस्था कराई थी।
आज यह बाजार बेल्वे और आवर्से ग्राम पंचायतों के साथ-साथ कुंदापुर, हेब्री और ब्रह्मावर तालुकों के सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए भी प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन चुका है।
पश्चिमी घाट की उपज का पुराना केंद्र
पश्चिमी घाट की तलहटी में स्थित गोलीयंगडी कभी जंगल और ग्रामीण उपज की बिक्री के लिए प्रसिद्ध था। आसपास के गांवों के किसान बैलगाडिय़ों में सब्जियां और अन्य कृषि उपज लाकर बेचते थे। समय के साथ बाजार का विस्तार हुआ और अब विभिन्न जिलों से व्यापारी सब्जियां, फल, मसाले और अन्य सामान लेकर पहुंचते हैं।
बेल्वे ग्राम पंचायत को सालाना 35 लाख रुपए से अधिक की अपनी आय होने के बावजूद गोलीयंगडी बाजार में मूलभूत सुविधाओं का अभाव सवाल खड़ा करता है।
सरकारी जमीन का अभाव
गोलीयंगडी बाजार राज्य राजमार्ग के दोनों ओर लगता है, इसलिए जोखिम अधिक है। बाजार के आसपास कोई सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं है। सरकारी स्कूल के पास बाजार बनाने का विचार पहले किया गया था, लेकिन अनुमति नहीं मिल सकी।
–सतीश नायक, विकास अधिकारी, बेल्वे ग्राम पंचायत
सुविधाएं बढ़ें तो गांव को भी लाभ
बुजुर्गों के प्रयासों से गोलीयंगडी का साप्ताहिक बाजार शुरू हुआ और इससे बेल्वे ग्राम पंचायत को भी अच्छी आय होती है। पंचायत यदि उचित जगह तलाश कर सुविधाओं से युक्त बाजार विकसित करे तो राजस्व के साथ पूरे क्षेत्र का विकास होगा।
–सुरेश शेट्टी, सेवानिवृत्त शिक्षक एवं उद्यमी, बेल्वे
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