पश्चिमी घाट में 8,288 करोड़ की वाराही जलविद्युत परियोजना पर पर्यावरणीय चिंतापश्चिमी घाट।

केपीसीएल ने 2,500 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज परियोजना के सर्वे का प्रस्ताव भेजा

सोमेश्वर-मूकांबिका अभयारण्यों और वन्यजीवों पर असर की आशंका

कार्कल (उडुपी)। कर्नाटक विद्युत निगम लिमिटेड (केपीसीएल) ने पश्चिमी घाट के पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में 8,288 करोड़ रुपए की लागत से 2,500 मेगावाट क्षमता वाली वाराही पंप्ड स्टोरेज जलविद्युत परियोजना विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। निगम ने परियोजना के लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण की अनुमति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है।

वन्यजीव अभयारण्यों पर पड़ सकता है असर

प्रस्तावित परियोजना के सोमेश्वर और मूकांबिका वन्यजीव अभयारण्यों के क्षेत्र में आने की संभावना है। यद्यपि परियोजना का मुख्य क्षेत्र शिवमोग्गा जिले में होगा, लेकिन इसका प्रभाव उडुपी जिले तक फैले पश्चिमी घाट के जंगलों पर भी पड़ सकता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे कुंदापुर, बयंदूर, हेब्री और तटीय क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढऩे की आशंका है।

319 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होने की संभावना

प्राथमिक आकलन के अनुसार परियोजना से लगभग 319 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हो सकता है तथा 27 राजस्व गांव प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसके दायरे में आएंगे। यह क्षेत्र कुद्रेमुख वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आता है, जहां सदाबहार वन, शोला वन, अनेक जलस्रोत तथा दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है।

दुर्लभ जीव-जंतुओं के आवास पर खतरा

इस क्षेत्र से वाराही, सीता, स्वर्णा और सौपर्णिका जैसी नदियां प्रवाहित होती हैं। यहां बाघ, तेंदुआ, हाथी, गौर, सांभर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ता, मालाबार विशाल गिलहरी, शेरपूंछ बंदर, मालाबार सिवेट तथा ग्रेट हॉर्नबिल, मालाबार ग्रे हॉर्नबिल और मालाबार ट्रोगन जैसे दुर्लभ पक्षियों का निवास है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय, सुरंग, विद्युत केंद्र, पहुंच मार्ग और ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से वन्यजीवों के आवागमन के मार्ग बाधित हो सकते हैं।

अभी अंतिम मंजूरी नहीं

परियोजना को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। सर्वेक्षण की अनुमति मिलने के बाद भू-वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और तकनीकी अध्ययन कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद पर्यावरण प्रभाव आकलन (इआइए), जनसुनवाई और वन स्वीकृति जैसी अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही परियोजना पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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