खिलारी बैलों की मांग बरकरार, 1.50 से 3.60 लाख रुपए तक बिकी जोड़ी
महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से पहुंचे किसान
मूडलगी (बेलगावी)। हर साल जुलाई-अगस्त आते ही मूडलगी का प्रसिद्ध पशु बाजार बैल और भैंसों की खरीद-बिक्री के लिए गुलजार हो जाता है। इस बार मानसून के कमजोर रहने के बावजूद रविवार को लगने वाले बाजार में खरीदारों की कमी नहीं रही। कर्नाटक के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गोवा और तमिलनाडु से भी किसान यहां पशु खरीदने पहुंच रहे हैं।
सैकड़ों वर्षों का इतिहास समेटे मूडलगी पशु बाजार आज भी अपनी परंपरा कायम रखे हुए है। खासकर खिलारी नस्ल के बैलों की बिक्री के लिए इसकी अलग पहचान है।
मंटूर के किसान बापूसाहेब पाटील ने बताया कि मैं 40 वर्षों से मूडलगी के पशु बाजार में आ रहा हूं। यहां जैसे मजबूत और अच्छी नस्ल के पशु मिलते हैं, वैसे दूसरे बाजारों में नहीं मिलते। यहां लगभग सभी नस्लों के बैल और भैंस उपलब्ध होते हैं।
खिलारी बैलों की जोड़ी 3.60 लाख तक
बाजार में प्रवेश करते ही एक ओर खिलारी बैलों और सांडों की खरीद-बिक्री चल रही थी, जबकि दूसरी ओर जवारी और एचएफ नस्ल की गायों की बिक्री हो रही थी।
पशु व्यापारी सुभाष तलवार ने बताया कि कार हुन्निमे (पूर्णिमा) पर्व के बाद किसान बैलों की खरीद शुरू करते हैं। पिछले दो सप्ताह से बैलों की बिक्री में तेजी आई है।
रविवार को बाजार में खिलारी बैलों की जोड़ी 1.50 लाख रुपये से लेकर 3.60 लाख रुपए तक में बिकती दिखाई दी।
भैंसों की कई नस्लें उपलब्ध
बाजार के एक हिस्से में दूर-दूर तक भैंसों की कतारें नजर आईं। यहां मुर्रा, मेंडा, जाफरी, मशाल, करनाली, जवारी और पंढरपुर गवली समेत विभिन्न नस्लों की भैंसें बिक्री के लिए लाई गई थीं। मेंडा नस्ल की भैंसों की कीमत 2.50 लाख रुपए तक पहुंची।
भैंस मालिक रवींद्र सन्नक्की के अनुसार, “मेंडा नस्ल की भैंस दिन में दो बार मिलाकर करीब 20 लीटर तक दूध देती है।”
पशु व्यापारी सलील होसमनी ने बताया कि 80 हजार से एक लाख रुपए कीमत वाली करनाली नस्ल की भैंसों की बाजार में अच्छी मांग है।
सुविधाओं की कमी से किसान परेशान
पशु बाजार में खरीद-बिक्री का कारोबार भले ही जोरदार हो, लेकिन सुविधाओं की कमी को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों ने बाजार परिसर में उगी घास-फूस और कचरे की नियमित सफाई, पूरे परिसर में बिजली की व्यवस्था और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके अलावा दूर-दराज से आने वाले किसानों के ठहरने और आराम के लिए सुविधायुक्त किसान भवन बनाने की भी मांग उठाई गई है।
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