जनगणना तक टली धारवाड़ अलग नगर निगम की राहमहानगर निगम कार्यालय हुब्बल्ली।

राज्य सरकार ने विधानसभा में साफ किया—फिलहाल सीमा परिवर्तन संभव नहीं

निर्णय 2027 के अंत या 2028 तक खिसकने के आसार

हुब्बल्ली। हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम को विभाजित कर धारवाड़ के लिए अलग नगर निगम बनाने की मांग को फिलहाल झटका लगा है। राज्य सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक नए नगरीय निकायों का गठन अथवा उनकी सीमा में बदलाव संभव नहीं है। ऐसे में अलग नगर निगम की अंतिम अधिसूचना का मामला अब 2027 के अंत या 2028 तक टलने के संकेत हैं।

विधायक विनय कुलकर्णी के सवाल पर सरकार का जवाब

धारवाड़ के विधायक विनय कुलकर्णी के सवाल के लिखित जवाब में नगर विकास मंत्री ने बताया कि देश में जनगणना की प्रक्रिया जारी है। पहला चरण पूरा होने के बाद दूसरा चरण जून-जुलाई 2027 तक पूरा होने का अनुमान है। जनगणना-2027 के आंकड़े जारी होने के बाद नए नगरीय निकायों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

2025 में जारी हुई थी प्रारंभिक अधिसूचना

कांग्रेस सरकार ने धारवाड़ को अलग नगर निगम बनाने के संबंध में 21 जनवरी 2025 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। राज्यपाल की मंजूरी में देरी के बाद 2026 में इसे स्वीकृति मिली। हालांकि, जनगणना प्रक्रिया शुरू होने के कारण 31 दिसंबर 2025 के बाद स्थानीय निकायों की सीमाओं में बदलाव पर रोक संबंधी नियम लागू हो गया।

इसके चलते अलग नगर निगम की अंतिम अधिसूचना जारी करने में तकनीकी अड़चन सामने आ गई है।

आंदोलनकारियों में बढ़ी नाराजगी

धारवाड़ अलग नगर निगम संघर्ष समिति का कहना है कि सरकार ने जल्द निर्णय का भरोसा देकर आंदोलन को रोका था, लेकिन अब मामला आगे खिसकता दिखाई दे रहा है। समिति ने मुख्यमंत्री के साथ 21 अगस्त तक बैठक तय नहीं होने पर रात-दिन धरना और जनआंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष वेंकटेश माचकनूर ने कहा कि राज्यपाल ने भी जनगणना पूरी होने तक सीमा परिवर्तन नहीं करने की बात कहते हुए फाइल सरकार को लौटाई थी। अब सरकार भी यही बात कह रही है। उन्होंने कहा कि बी.डी. हिरेमठ के नेतृत्व में बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

महानगरीय शहर बनाने के प्रस्ताव का विरोध

हुब्बल्ली-धारवाड़ को विभाजित करने के बजाय महानगरीय शहर बनाने के प्रस्ताव का भी संघर्ष समिति विरोध कर रही है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि धारवाड़ के दैनिक प्रशासन और विकास के लिए अलग नगर निगम जरूरी है। उनका दावा है कि 200 से अधिक संगठनों ने अलग नगर निगम की मांग का समर्थन किया है।

वहीं, सरकार के सामने फिलहाल दो विकल्पों—अलग नगर निगम या महानगरीय शहर को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने तक यह विवाद कम से कम एक वर्ष और जारी रहने के आसार हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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