एसआईआर के लिए पुराने रिकॉर्ड से तैयार प्रतियां
नए आवेदक सर्वर समस्या से परेशान
उडुपी। आय और जाति प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वाले लोग सर्वर और तकनीकी दिक्कतों के कारण कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों के घर तक भी आय और जाति प्रमाणपत्र पहुंच रहे हैं, जिन्होंने इसके लिए कोई आवेदन ही नहीं किया। इसे लेकर लोगों में हैरानी के साथ कई सवाल भी उठ रहे हैं।
पुराने प्रमाणपत्रों की प्रतियां पहुंचीं
कई लोगों को नए प्रमाणपत्र के बजाय 2021 से 2024 के बीच जारी प्रमाणपत्रों की प्रतियां दोबारा मुद्रित कर भेजी गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने हाल में किसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया, फिर भी डाक अथवा राजस्व विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से प्रमाणपत्र घर पहुंचा है।
इससे सवाल उठ रहे हैं कि आवेदन किसने किया और किस आधार पर प्रमाणपत्र तैयार किए गए?
एसआईआर के लिए सरकार की विशेष पहल
एक तहसीलदार के अनुसार, ये सामान्य प्रक्रिया के तहत जारी नए प्रमाणपत्र नहीं हैं। विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) में दस्तावेजों के सत्यापन में सहायता के लिए सरकार ने यह विशेष व्यवस्था की है।
पुराने सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी के आधार पर जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र की डिजिटल प्रतियां तैयार कर उन्हें मुद्रित करके लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इसका उद्देश्य मतदाताओं के निवास और पहचान से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन में सहायता करना है।
नए आवेदकों की बढ़ी परेशानी
वहीं, जिन्हें तत्काल जरूरत के लिए नए आय या जाति प्रमाणपत्र की आवश्यकता है, उन्हें नाडकचेरियों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्वर संबंधी समस्याओं और अचानक बढ़े आवेदनों के कारण आवेदन से लेकर सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी होने तक की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
ई-केवाईसी ने बढ़ाया दबाव
राशन कार्ड ई-केवाईसी और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के लिए भी इन प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ रही है। इससे सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन आ रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बढ़े दबाव से सर्वर क्षमता, दस्तावेज सत्यापन और प्रमाणपत्र वितरण व्यवस्था पर असर पड़ा है।
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