पालक्काड रेल मंडल के विभाजन से 60 फीसदी राजस्व का झटका!मेंगलूरु रेलवे स्टेशन।

मेंगलूरु क्षेत्र के आंकड़े जुटाए गए, करीब 250 कर्मचारी स्थानांतरण की राह में

मंडल के अस्तित्व पर भी उठ सकता है सवाल

मेंगलूरु (दक्षिण कन्नड़)। मेंगलूरु क्षेत्र को पालक्काड रेल मंडल से अलग कर मैसूरु मंडल में शामिल करने के फैसले के बाद रेलवे में हलचल तेज हो गई है। मैसूरु मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों ने मेंगलूरु सेंट्रल और मेंगलूरु जंक्शन समेत क्षेत्र के कर्मचारियों की गणना और राजस्व संबंधी आंकड़े जुटाने का काम पूरा कर लिया है। इसके लिए अधिकारी पिछले दो दिनों से मेंगलूरु में डेरा डाले हुए थे।

रेलवे के इस पुनर्गठन से पालक्काड मंडल को राजस्व और ट्रेन सेवाओं के लिहाज से बड़ा नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मेंगलूरु क्षेत्र अलग होने के बाद पालक्काड मंडल के करीब 60 प्रतिशत राजस्व के प्रभावित होने की संभावना है। साथ ही कई ट्रेन सेवाओं के भी मंडल से बाहर होने की स्थिति बन सकती है।

250 कर्मचारी स्थानांतरण के इंतजार में

मेंगलूरु स्टेशन क्षेत्र में कार्यरत करीब 250 कर्मचारी पालक्काड मंडल में स्थानांतरण के लिए आवेदन करने का इंतजार कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने पहले भी मांग की थी कि स्थानांतरण चाहने वाले कर्मचारियों को उनकी पसंद के स्थानों पर नियुक्ति दी जाए।

हालांकि, आरोप है कि मैसूरु मंडल के कुछ वरिष्ठ अधिकारी कई कर्मचारियों को मैसूरु मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानांतरित करने का प्रयास कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों के स्तर पर इसको लेकर असंतोष है।

17 किलोमीटर क्षेत्र, लेकिन बड़ा राजस्व नुकसान

रेलवे के आदेश के अनुसार 1 अक्टूबर से मेंगलूरु सेंट्रल और मेंगलूरु जंक्शन को पालक्काड मंडल से हटाकर मैसूरु मंडल में शामिल किया जाना है। क्षेत्रफल की दृष्टि से पालक्काड मंडल से केवल करीब 17 किलोमीटर का हिस्सा अलग होगा, लेकिन इसके साथ मंडल के राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

राजस्व में भारी कमी के बाद पालक्काड मंडल के भविष्य को लेकर भी रेलवे स्तर पर गंभीर समीक्षा की संभावना जताई जा रही है। मंडल के पास छह प्रमुख ट्रेन सेवाएं रह जाने की स्थिति बनने की बात सामने आई है।

रेलवे की दलील-एक ही मंडल में लाने से बढ़ेगी दक्षता

रेलवे का कहना है कि मेंगलूरु क्षेत्र वर्तमान में तीन अलग-अलग रेल व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है। इसे एक ही रेल मंडल के अधीन लाने से परिचालन दक्षता बढ़ाने, ट्रेन सेवाओं के बेहतर समन्वय, समय-सारिणी निर्धारण, यात्री सुविधाओं और माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

रेलवे के अनुसार यह पुनर्गठन किसी क्षेत्र के साथ भेदभाव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि परिचालन व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाने के लिए किया जा रहा है।

मलाबार के लिए नई रेल परियोजनाओं की मांग

पालक्काड मंडल के पुनर्गठन के बीच मलाबार क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं के विस्तार की मांग भी तेज हो रही है। कुम्बला, कन्नूर और कोझिकोड में नए रेलवे टर्मिनल विकसित करने के साथ जरूरत के अनुसार आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की गई है।

इसके अलावा त्रिशूर-तिरुप्पुर (पोल्लाची होकर) नई रेल लाइन, पूर्व में सर्वे किए गए अंगाडिपुरम-कोझिकोड मार्ग को लागू करने, शोरनूर-निलंबूर रेल लाइन का दोहरीकरण तथा करीब 40 एकड़ भूमि वाले निलंबूर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई गई है।

फैसले के बाद क्या बदलेगा?

1 अक्टूबर से

मेंगलूरु सेंट्रल मैसूरु मंडल में जाएगा।
मेंगलूरु जंक्शन भी मैसूरु मंडल के अधीन होगा।
पालक्काड मंडल का करीब 17 किमी क्षेत्र कम होगा।
करीब 250 कर्मचारी स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पालक्काड मंडल के राजस्व पर बड़ा असर पडऩे की संभावना।
ट्रेन सेवाओं के पुनर्गठन की स्थिति बन सकती है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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