कर्नाटक में रबी पर भी सूखे का साया! ‘सुपर अल नीनो’ से खेती पर संकटप्रतिकात्मक फोटो।

24.50 लाख हेक्टेयर में रबी बुवाई का लक्ष्य, लेकिन बारिश ने बढ़ाई चिंता

15 सितंबर तक मानसून में सिर्फ 518.1 मिमी वर्षा

सामान्य मानसूनी बारिश 1,155 मिमी होनी चाहिए थी

अब तक लक्ष्य के मुकाबले बुवाई भी पिछड़ी, उत्तर कर्नाटक के किसानों की बढ़ी चिंता

हुब्बल्ली। कर्नाटक में मानसून की बेरुखी के बाद अब रबी सीजन पर भी सूखे का साया मंडरा रहा है। मौसम में बदलाव और ‘सुपर अल नीनो’ के प्रभाव की आशंका के बीच आगामी रबी सीजन में बारिश कम होने की संभावना जताई जा रही है। इससे राज्य में कृषि गतिविधियां और प्रभावित होने की चिंता बढ़ गई है।

कृषि विभाग के अनुसार, इस बार राज्य में रबी सीजन के दौरान 24.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। रबी में चना, मूंगफली, कुसुम और ज्वार प्रमुख फसलें हैं। इसके अलावा कई क्षेत्रों में उड़द, सूरजमुखी और विभिन्न मोटे अनाज की भी बुवाई होती है।

उत्तर कर्नाटक के कई जिलों के किसान रबी फसलों पर काफी निर्भर हैं। यादगीर, बीदर, बल्लारी, हावेरी, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, तुमकूरु समेत कई जिलों में रबी की बुवाई बड़े क्षेत्र में होती है। ऐसे में बारिश में कमी की आशंका किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

मानसून में भी बारिश का बड़ा घाटा

सुपर अल नीनो के प्रभाव से बारिश में कमी के साथ तापमान बढऩे की संभावना भी जताई जा रही है। राज्य में इस बार मानसून सीजन में 84.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक करीब 69 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है।

सामान्य तौर पर मानसून में राज्य में करीब 1,155 मिमी बारिश होती है। लेकिन 15 सितंबर तक सिर्फ 518.1 मिमी बारिश दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में बारिश की कमी से फसलों पर असर पड़ा है।

क्या है ‘सुपर अल नीनो’?

प्रशांत महासागर की सतह के पानी का तापमान सामान्य से असामान्य रूप से बढऩे की स्थिति को अल नीनो कहा जाता है। जब यह प्रभाव बेहद मजबूत हो जाता है तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ कहा जाता है। इसका असर वैश्विक मौसम प्रणाली पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने आने वाले महीनों में इस प्रभाव के मजबूत होने की आशंका जताई है।

बीज और खाद का स्टॉक तैयार

बारिश को लेकर चिंता के बीच कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि रबी और गर्मी के मौसम के लिए बीज और उर्वरक की कमी नहीं है। रबी सीजन के लिए करीब 2.50 लाख क्विंटल बीज की जरूरत अनुमानित है। इनमें चना, ज्वार, मूंगफली और कुसुम प्रमुख हैं।

कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में फिलहाल करीब 13.92 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है। केंद्र सरकार की ओर से भी रबी और गर्मी सीजन के लिए आवश्यक उर्वरक का आवंटन किया जा चुका है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को बीज और उर्वरक की उपलब्धता को लेकर परेशानी नहीं होगी।

 

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By Bharat Ki Awaz

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