रेत के नीचे बनेंगे सब-सरफेस चेकडैम, सूखे से मिलेगी राहत
नदी के बहाव को रोके बिना जमीन के भीतर पानी रोकेगी अनूठी तकनीक, नमी रहेगी बरकरार
आंध्र प्रदेश के सफल मॉडल की तर्ज पर बल्लारी की वेदवती नदी में पायलट प्रोजेक्ट की तैयारी
जिले में 15 स्थानों की पहचान; 40 से 50 करोड़ रुपए की लागत से 5 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य
बल्लारी। लगातार मानसूनी बेरुखी और गिरते भूजल स्तर से जूझ रहे बल्लारी जिले को सूखे के संकट से उबारने के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वाकांक्षी जल-संरक्षण योजना तैयार की है। नदियों और जलस्रोतों के जरिए भूमिगत जलस्तर बढ़ाने के उद्देश्य से जिले में अभिनव सब-सरफेस चेकडैम (सतह के नीचे का चेक डैम) बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है।
आंध्र प्रदेश में सफल रहे इस मॉडल को अपनाते हुए बल्लारी जिला प्रशासन वेदवती नदी में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहला भूमिगत बांध बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके साथ ही पूरे जिले में ऐसे 15 उपयुक्त स्थानों को चिह्नित किया जा रहा है।
सब-सरफेस चेकडैम तकनीक
पारंपरिक चेकडैम सतह के ऊपर नदी के बहाव को रोकते हैं, जिससे अक्सर गाद जमा होने और वाष्पीकरण से पानी सूखने की समस्या आती है। इसके विपरीत, सब-सरफेस चेकडैम पूरी तरह नदी के तल (बेड) के भीतर जमीन के नीचे बनाया जाता है।
नदी की ऊपरी रेत को नीचे मौजूद ठोस चट्टानी परत (आधार) तक गहरा खोदा जाता है। इस गहरी खाई में अभेद्य चिकनी मिट्टी या कंक्रीट की मजबूत भूमिगत दीवार तैयार की जाती है। यह अदृश्य दीवार रेत के बीच से होकर भूगर्भ में बह जाने वाले पानी की गति को धीमा कर देती है।
सतह पर नदी का सामान्य प्रवाह बाधित नहीं होता, जबकि जमीन के भीतर रुका हुआ जल आसपास के कई किलोमीटर दायरे में कुओं, बोरवेल और मिट्टी की नमी को रिचार्ज करता रहता है।
आंध्र प्रदेश के मॉडल पर मंथन, वेदवती नदी का चयन
बल्लारी तालुक के हगरी क्षेत्र स्थित वेदवती नदी में रेत की अत्यधिक मात्रा होने के कारण बारिश का पानी टिकता नहीं है और तेजी से बह जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने आंध्र प्रदेश के उन सरकारी इंजीनियरों के साथ संयुक्त बैठक की है, जिन्होंने वहां इस तकनीक का सफल क्रियान्वयन किया है। जिलाधिकारी, जिला पंचायत सीइओ और किसान प्रतिनिधियों ने परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता और अनुमानित लागत पर विस्तृत चर्चा की है।
40 से 50 करोड़ की लागत, 5 महीने में निर्माण संभव
अधिकारियों के अनुसार, एक सब-सरफेस चेकडैम के निर्माण में औसतन एक महीने का समय लगता है। जिले के 15 चयनित स्थलों पर परियोजना को पूरा करने में करीब 40 से 50 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है। सरकार से वित्तीय स्वीकृति मिलते ही अगले पांच महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वीकृति मिलते ही शुरू होगा कार्य
सब-सरफेस चेकडैम के तकनीकी खाके, लागत और फंड की उपलब्धता के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। सरकार से औपचारिक मंजूरी मिलते ही वेदवती नदी में जल्द से जल्द पायलट प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया जाएगा।
–मोहम्मद हारिस सुमेर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला पंचायत, बल्लारी
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