सुल्या-कडबा से पुत्तूर और बेल्तंगडी तक बढ़ा मानव-हाथी संघर्ष
किसान बोले-हाथी भगाने से नहीं, स्थायी समाधान से बचेगी जान
सुल्या (दक्षिण कन्नड़)। दक्षिण कन्नड़ जिले के वन सीमावर्ती गांवों में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। सुल्या, कडबा, पुत्तूर और बेल्तंगडी तालुकों के कई गांवों में हाथी खेतों और बागानों में घुसकर सुपारी, नारियल, केला, रबर और धान समेत विभिन्न फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसान, रबर श्रमिक, स्कूली बच्चे और आम लोग हर कदम पर जान के खतरे के बीच आवाजाही करने को मजबूर हैं।
एक दशक पहले तक हाथियों का संघर्ष कुछ वन सीमावर्ती इलाकों तक सीमित था, लेकिन अब इसका दायरा कई तालुकों के गांवों तक फैल गया है। हाथियों के पारंपरिक गलियारों में बाधा, जंगलों में बदलाव, पानी और भोजन की कमी तथा खेतों में उपलब्ध आकर्षक फसलें मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
कई लोगों की जा चुकी है जान
दक्षिण कन्नड़ में पिछले वर्षों में हाथियों के हमलों में कई लोगों की मौत हो चुकी है। 2021 में कल्मकार में शिवराम, 2023 में शिराड़ी क्षेत्र में तिम्मप्पा तथा रेंजिलाडी में रंजिता और रमेश की मौत हुई। इसके बाद ऐत्तूर के चोम और 2025 में कोल्तिगे क्षेत्र की सेलम्मा तथा बेल्तंगडी क्षेत्र के बालकृष्ण की मौत के मामले सामने आए।
किसानों के अनुसार अब हाथियों का खतरा केवल खेतों तक सीमित नहीं है। सडक़ पर वाहनों के सामने हाथियों के आने और सार्वजनिक परिवहन के लिए खतरा पैदा होने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
28 सदस्यीय विशेष टास्क फोर्स
हाथी संघर्ष से निपटने के लिए दक्षिण कन्नड़ में 28 कर्मचारियों वाली अलग हाथी टास्क फोर्स गठित की जा रही है, जिसका केंद्र सुल्या होगा। इसका उद्देश्य हाथियों के गांवों में पहुंचते ही तत्काल कार्रवाई, उनकी आवाजाही पर निगरानी और स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया देना है।
हालांकि किसानों का कहना है कि केवल हाथियों को जंगल की ओर खदेडऩा स्थायी समाधान नहीं है। हाथी गलियारों की सुरक्षा, जंगल में पानी-भोजन की उपलब्धता, वन-कृषि सीमा का संरक्षण और मानव बस्तियों के विस्तार को साथ में ध्यान में रखना होगा।
पुत्तूर के कावु निवासी सुनील बोर्कर ने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर जोखिम क्षेत्र घोषित करना चाहिए। त्वरित चेतावनी प्रणाली, विशेष गश्त, प्रभावी अवरोधक व्यवस्था और फसल नुकसान का तत्काल मुआवजा सुनिश्चित करना चाहिए।
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