लिंगनमक्की में 23 फीट पानी कम
जलसंचय सिर्फ 60.48 प्रतिशत
गर्मियों में लोडशेडिंग की आहट
जोगफॉल्स (शिवमोग्गा)। मलेनाडु की पहचान जोग जलप्रपात इस बार पानी की कमी से मुरझाने लगा है। जिस लिंगनमक्की जलाशय के पानी से शरावती परियोजना राज्य को बिजली देती है, वही जलाशय इस साल अब तक पूरी तरह भर नहीं पाया है। नतीजा—जोग की धार कमजोर है और आने वाली गर्मियों में बिजली संकट की चिंता बढ़ गई है।
1,819 फीट पूर्ण जलस्तर वाले लिंगनमक्की में शुक्रवार को पानी 1,795.50 फीट था। यानी जलाशय अभी 1,800 फीट के स्तर तक भी नहीं पहुंचा है। पिछले साल इसी समय जलाशय लबालब था और नदी में पानी छोड़ा जा रहा था। इस बार करीब 23 फीट पानी कम है। जलसंचय केवल 60.48 प्रतिशत है, जबकि 39.52 प्रतिशत की कमी बनी हुई है।
एक मेगावाट के लिए 9-10 क्यूसेक पानी
शरावती विद्युत केंद्र में एक मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए 9 से 10 क्यूसेक पानी चाहिए। इसलिए जलाशय में बचा पानी पूरे साल बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त नहीं है। मांग के मुताबिक उत्पादन घटाना-बढ़ाना पड़ रहा है। रात, अवकाश और कम मांग वाले समय में उत्पादन कम कर पानी बचाया जाता है।
लेकिन इस बार चुनौती बड़ी है। राज्य के प्रमुख जलविद्युत जलाशयों में पर्याप्त जलसंचय नहीं हुआ है। ऐसे में गर्मियों में बिजली की मांग बढऩे पर लोडशेडिंग का दबाव बढ़ सकता है।
जोग पर भी सूखे की मार
मानसून समाप्त होने में अभी समय है, लेकिन जोग क्षेत्र में पिछले एक महीने से गर्मी जैसे हालात हैं। जोग की धार बनाए रखने के लिए केपीसी चाइना गेट से थोड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। एमजीएचई पावर चैनल से रिसकर आने वाला पानी भी जलप्रपात तक पहुंच रहा है। यह पानी बंद हुआ तो गर्मियों में जोग के पूरी तरह सूखने का खतरा है।
अधिकारियों ने कहा कि कार्गल-जोग में पेयजल संकट की आशंका को देखते हुए 6,000 लीटर क्षमता का टैंकर भी खरीदा गया है। अब चुनौती साफ है कि सीमित पानी से जोग को बचाना है, बिजली बनानी है और गर्मियों के लिए पेयजल भी सुरक्षित रखना है।
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