सूखे में भी बढ़ा कुओं का जलस्तर
चार एकड़ में सब्जियां और बागवानी फसलें ले रहे किसान
औराद (बीदर)। बारिश ने साथ छोड़ दिया, खेतों में फसलें अंकुरित होने से पहले ही सूखने लगीं, लेकिन औराद तालुक के मुंगनाल गांव में बने एक चेकडैम ने कुछ किसानों के लिए उम्मीद बचा रखी है। बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोककर जमीन में उतारने के उद्देश्य से महाराष्ट्र की एक जल संरक्षण संस्था द्वारा सीमावर्ती गांवों में बनाए जा रहे चेकडैम का असर अब दिखाई देने लगा है।
मुंगनाल में किसानों के खेतों के पास करीब 500 मीटर लंबा, 12 मीटर चौड़ा और 3.5 मीटर गहरा चेकडैम बनाया गया है। बारिश कम होने के बावजूद इसमें पानी जमा है। इससे आसपास के कुओं में पानी का रिसाव बढ़ा है और किसानों को सीमित सिंचाई सुविधा मिल रही है।
किसान गोविंद इंगले ने बताया कि चेकडैम बनने के बाद मेरे कुएं में पानी का प्रवाह बढ़ा है। सूखे के बावजूद चार एकड़ खेत में सिंचाई कर पा रहा हूं। सोयाबीन और तुअर जहां अंकुरित तक नहीं हुई, वहां अब सब्जियां और बागवानी फसलें उगा रहा हूं।
चेकडैम निर्माण पर करीब 3.50 लाख रुपए खर्च हुए। इसमें किसान ने 15 हजार रुपए का योगदान दिया, जबकि शेष राशि संस्था ने वहन की।
बारिश कम हो तो हर बूंद की कीमत बढ़ जाती है-मुंगनाल का चेकडैम इसका जीवंत उदाहरण है।
गोविंद इंगले के अनुसार, तालुक के 33 गांवों में ऐसे चेकडैम बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि कर्नाटक सरकार भी बड़े स्तर पर ऐसी जल संरक्षण योजनाएं लागू करे तो सूखे से जूझ रहे किसानों को राहत मिल सकती है।
भूजल स्तर बढ़ाने में मदद
चेकडैम बारिश के पानी को तेजी से बहने से रोककर जमीन में उतारने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे कुओं और सिंचाई पर निर्भर किसानों को सीधा लाभ मिल सकता है।
–मातांड, सहायक कृषि निदेशक, औराद
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