कर्नाटक में नई गाइडलाइन की तैयारी
3 बार से ज्यादा इस्तेमाल पर रोक
टीपीएस 25 प्रतिशत से अधिक हुआ तो तेल असुरक्षित
हुब्बल्ली। होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी और घरों में एक ही खाना पकाने के तेल को बार-बार गर्म कर इस्तेमाल करने की आदत पर अब रोक लग सकती है। कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग प्रयुक्त खाना पकाने का तेल (यूसीओ) के प्रबंधन को लेकर नई गाइडलाइन लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमों के तहत एक ही तेल को तीन बार से अधिक इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। वहीं, तेल में कुल ध्रुवीय यौगिक (टीपीसी) की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक होने पर उसे मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त माना जाएगा।
सरकार का उद्देश्य इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म कर खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करने से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के साथ-साथ उसे नालियों में बहाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को रोकना है।
पुराने तेल से बनेगा बायोडीजल
स्वास्थ्य विभाग इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल को नालियों में बहाने के बजाय एकत्र कर बायोडीजल और अन्य जैव ईंधन के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है। घरों से निकलने वाले तेल को भी वार्ड स्तर पर स्थानीय निकायों के माध्यम से एकत्र करने पर विचार किया जा रहा है।
एकत्र तेल को आरयूसीओ (प्रयुक्त खाना पकाने के तेल का पुन: उपयोग) एजेंसियों तथा अधिकृत बायोगैस/बायोफ्यूल कंपनियों को देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। राज्य में 2024-25 और 2025-26 के दौरान कुल 32.68 लाख लीटर इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल एकत्र करने का लक्ष्य/रिकॉर्ड बताया गया है।
होटलों पर होगी निगरानी
नई गाइडलाइन लागू होने के बाद होटल और खाद्य निर्माण इकाइयों को इस्तेमाल किए गए तेल का रिकॉर्ड रखना पड़ सकता है। तेल कितनी बार इस्तेमाल हुआ, इसकी निगरानी स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई के जरिए की जाएगी। इस्तेमाल किए गए तेल को अधिकृत सीओ संग्रह एजेंसियों को सौंपना भी अनिवार्य किया जा सकता है।
प्रस्तावित नियम
3 बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं: एक ही तेल को बार-बार गर्म कर तलने के लिए अधिकतम तीन बार इस्तेमाल करने का प्रावधान प्रस्तावित है।
टीपीसी की सीमा 25 प्रतिशत: बार-बार गर्म करने से तेल में कुल ध्रुवीय यौगिक बढ़ते हैं। टीपीसी 25 प्रतिशत से अधिक होने पर तेल को त्यागना होगा।
धुआं या झाग दिखे तो इस्तेमाल बंद: तेल गर्म करते समय नीला या धूसर धुआं निकलने लगे अथवा झाग बनने लगे तो उसका इस्तेमाल रोकना होगा। तेल का रंग बहुत गहरा या स्वरूप असामान्य होने पर भी उसे इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
लंबे समय तक भंडारण नहीं: इस्तेमाल किए गए तेल को लंबे समय तक जमा करके रखने के बजाय निर्धारित अवधि में निपटाने की व्यवस्था होगी।
नाली में डालना प्रतिबंधित: सीओ को सिंक, सीवर या नाले में डालने के बजाय अधिकृत संग्रह एजेंसी को देना होगा।
महत्वपूर्ण है टीपीसी
तेल को बार-बार तेज तापमान पर गर्म करने से उसमें रासायनिक परिवर्तन होते हैं और टीपीसी जैसे यौगिकों की मात्रा बढ़ती है। इसलिए टीपीसी का स्तर इस्तेमाल किए गए तेल की गुणवत्ता और खाद्य उपयोग के लिए उसकी उपयुक्तता जांचने का एक महत्वपूर्ण मानक है।
नई व्यवस्था लागू होने पर होटल-रेस्टोरेंट के साथ घरों में निकलने वाले इस्तेमाल किए गए तेल के सुरक्षित निपटान पर भी जोर रहेगा।
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