इवीएम ऑडिट की मांग के साथ खरगे ने आरएसएस पर भी साधा निशाना

बोले—आरएसएस का वित्तीय हिसाब-किताब कहां है? पंजीकरण शुल्क मैं दूंगा, जल्द पंजीकरण कराएं

हुब्बल्ली। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने इवीएम की सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कानूनी एवं वित्तीय पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और आरएसएस पर सवाल उठाए हैं। सोमवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए खरगे ने आरएसएस से पंजीकरण कराने और वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।

खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि आरएसएस के पंजीकरण के लिए लगने वाला शुल्क वे स्वयं देने को तैयार हैं। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को जल्द संगठन का विधिवत पंजीकरण कराने की चुनौती दी। आरएसएस की कानूनी स्थिति को लेकर खरगे पहले भी पंजीकरण, संपत्ति, दान और लेखापरीक्षण संबंधी सवाल उठा चुके हैं।

इवीएम को लेकर खरगे ने निर्वाचन आयोग के राजनीतिक दलों को दिए जा रहे चैलेंज पर भी सवाल उठाया। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में राजनीतिक दलों के बजाय स्वतंत्र साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, सॉफ्टवेयर इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की भागीदारी वाला न्यायालय की निगरानी में तकनीकी ऑडिट और एथिकल हैकाथॉन कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि इवीएम की संरचना, सॉफ्टवेयर, अभिगम नियंत्रण और संभावित तकनीकी कमजोरियों की जांच विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए। खरगे ने कर्नाटक के तकनीकी क्षेत्र की विशेषज्ञता उपलब्ध कराने और स्वतंत्र जांच का पूरा खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन करने की पेशकश भी की है।

आरएसएस के वित्तीय स्रोतों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने गुरुदक्षिणा सहित विभिन्न माध्यमों से प्राप्त धनराशि, लेखापरीक्षण और वित्तीय पारदर्शिता की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। हालांकि, आरएसएस का पक्ष रहा है कि उसके संचालन के लिए औपचारिक पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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