हम्पी कन्नड़ विश्वविद्यालय में 200 पीजी सीटों पर प्रवेश
95 प्रतिशत से अधिक एससी-एसटी-ओबीसी विद्यार्थी
बीसीएम हॉस्टल स्थानांतरित हुआ तो 100 से अधिक छात्रों के सामने आवास का संकट
होसपेट (विजयनगर)। हम्पी कन्नड़ विश्वविद्यालय के विद्यरण्य परिसर स्थित बीसीएम छात्रावासों को स्थानांतरित करने की तैयारी के बीच विश्वविद्यालय ने स्नातकोत्तर और स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अधिसूचना जारी कर दी है। इससे जल्द दाखिला लेने वाले 100 से अधिक विद्यार्थियों के सामने रहने की व्यवस्था का सवाल खड़ा हो गया है।
विश्वविद्यालय में एमए कन्नड़ साहित्य, महिला अध्ययन, पत्रकारिता, एमपीए हिंदुस्तानी संगीत, एमवीए, एमएससी योग सहित विभिन्न स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों तथा पत्रकारिता, योग, पुरातत्व-संग्रहालय-पर्यटन के स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाना है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 20 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर निर्धारित की गई है और जल्द ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
सभी पाठ्यक्रमों को मिलाकर करीब 200 सीटें हैं। विद्यार्थियों के अनुसार इनमें 95 प्रतिशत से अधिक छात्र एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से आते हैं। ऐसे में कम से कम 100 विद्यार्थी बीसीएम छात्रावास में आवास के पात्र होंगे।
अधिसूचना में मुफ्त आवास, हॉस्टल हटेगा
विश्वविद्यालय की प्रवेश अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि परिसर में प्रवेश लेने वाले एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कर्नाटक सरकार के आदेश के अनुसार नि:शुल्क आवास सुविधा उपलब्ध होगी। विद्यार्थियों का सवाल है कि यदि छात्रावास को परिसर से होसपेट शहर में स्थानांतरित कर दिया गया तो इस प्रावधान का क्या अर्थ रह जाएगा। छात्रों के सामने यह भी सवाल है कि क्या उन्हें रोजाना होसपेट से विश्वविद्यालय परिसर तक आना-जाना पड़ेगा।
पढ़ाई और शोध पर पड़ेगा सीधा असर
विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रावास परिसर से शहर में स्थानांतरित होने पर पढ़ाई और शोध कार्य प्रभावित होंगे। परिसर में रहने से विद्यार्थी पुस्तकालय, विभागों, शोध केंद्रों, शिक्षकों और शोध मार्गदर्शकों से लगातार संपर्क में रह पाते हैं। इसके अलावा संगोष्ठी, व्याख्यान, चर्चा और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में भी आसानी से भाग ले सकते हैं।
विद्यार्थी शंकरप्पा बारकर और पी. गोणिबसप्पा सहित अन्य ने कहा कि छात्रावास को परिसर में ही बनाए रखना विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के लिहाज से जरूरी है।
छात्रों की प्रमुख मांगें
विद्यार्थियों ने छात्रावास स्थानांतरण का आदेश तत्काल रद्द करने की मांग की है। साथ ही पीएचडी शोधार्थियों का छात्रावास प्रवेश रद्द नहीं करने और शोध पूरा होने तक आवास सुविधा जारी रखने की मांग की है।
उन्होंने छात्रावास प्रवेश के लिए निर्धारित आयु सीमा हटाकर शैक्षणिक योग्यता और आवश्यकता को आधार बनाने तथा पीजी छात्रावास प्रवेश नियमों को विश्वविद्यालय के अधिनियम और परिनियमों के अनुरूप संशोधित करने की मांग की है।
स्थानांतरण के संबंध में निर्णय लिया जाएगा
पिछली स्थिति की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। जिलाधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के आधार पर छात्रावास स्थानांतरण के संबंध में निर्णय लिया जाएगा।
–शशिकला, जिला अधिकारी, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, विजयनगर
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